
मेहर चंद पॉलिटेक्निक के समस्त स्टाफ ने प्रख्यात इतिहासकार श्री मलविंदर सिंह वड़ैच के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए शोक प्रस्ताव पारित किया तथा उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। स्वतंत्रता सेनानियों के इतिहास को संजोने वाले विद्वान के रूप में प्रसिद्ध प्रोफेसर मलविंदर सिंह वड़ैच 96 वर्ष की आयु में पंचकूला में इस संसार को अलविदा कह गए। उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले सेनानियों के जीवन पर गंभीर शोध किया तथा अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं, जो आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जगरूप सिंह, विभिन्न विभागों के अध्यक्षों तथा समस्त स्टाफ सदस्यों ने शोक प्रस्ताव पारित करते हुए प्रोफेसर वड़ैच को श्रद्धासुमन अर्पित किए। सभी ने परमात्मा से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें। प्राचार्य डॉ. जगरूप सिंह ने कहा कि श्री वड़ैच सदैव उनके आदर्श रहे हैं। प्राचार्य डॉ. जगरूप सिंह ने बताया कि सरदार मलविंदर सिंह वड़ैच वर्ष 1987 से 1989 तक गुरु नानक इंजीनियरिंग कॉलेज में उनके अध्यापक रहे तथा वे मानविकी विषय पढ़ाया करते थे। वे विद्यार्थियों को केवल शिक्षा ही नहीं देते थे, बल्कि उन्हें जीवन जीने की सही दिशा और संस्कार भी प्रदान करते थे। उनके विद्यार्थी आज विश्व के विभिन्न देशों में कार्यरत हैं और उन्हें सम्मान एवं श्रद्धा के साथ याद करते हैं। उन्होंने बाबा सोहन सिंह भकना, बाबा हरनाम सिंह काला संघियां, पंडित किशोरी लाल तथा शहीद भगत सिंह की माता श्रीमती विद्यावती जैसे महान व्यक्तित्वों पर अत्यंत सराहनीय शोध कार्य किया। वर्ष 1989 में सेवानिवृत्त होने के पश्चात उन्होंने वकालत प्रारंभ की और अपना संपूर्ण जीवन गदर आंदोलन तथा बब्बर आंदोलन से जुड़े महान क्रांतिकारियों के शोध कार्यों के लिए समर्पित कर दिया। अपने निधन के उपरांत भी उन्होंने अपना शरीर चिकित्सकीय अनुसंधान एवं शोध कार्यों के लिए दान कर मानवता के प्रति अपनी महान भावना का परिचय दिया। मेहर चंद पॉलिटेक्निक संस्थान, उसका समस्त स्टाफ तथा विद्यार्थी उनके अतुलनीय योगदान, समाज एवं इतिहास के प्रति उनकी निष्ठा तथा उनके अथक कार्यों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं।