
जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में श्री शनिदेव महाराज जी के निमित सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान मंजू बतरा से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध मां बगलामुखी धाम में आयोजित दिव्य हवन यज्ञ के दौरान प्रज्वलित पावन अग्नि, वैदिक मंत्रों की गूंज और भक्तिमय वातावरण ने पूरे धाम को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत कर दिया। इसी दिव्य अवसर पर पीठ उपासक नवजीत भारद्वाज ने उपस्थित प्रभु भक्तों को आध्यात्मिक प्रवचनों से निहाल करते हुए प्रसिद्ध पंक्तियों, *‘‘मीठा मेवा बेरी देवे, फिर भी बट्टे खावे; सबर बेरी दा वेखो, नेकियां करी जावे।’’* का भावार्थ समझाया। उन्होंने कहा कि संसार में दो प्रकार के लोग होते हैं। एक वे, जो अच्छाई का उत्तर भी बुराई से देते हैं, और दूसरे वे, जो बुराई का जवाब भी प्रेम, सेवा और सद्भाव से देते हैं। बेरी का वृक्ष हमें यही दिव्य शिक्षा देता है। वह कभी यह भेद नहीं करता कि उसके फल खाने वाला गरीब है या अमीर, अपना है या पराया। वह सभी को समान रूप से मीठे फल प्रदान करता है। विडंबना यह है कि लोग उन्हीं मीठे फलों को पाने के लिए उस पर पत्थर बरसाते हैं, लेकिन बेरी अपना स्वभाव नहीं बदलती और निरंतर फल देती रहती है।
नवजीत भारद्वाज ने कहा कि संतों का जीवन भी इसी बेरी के समान होता है। संसार उन्हें अपमान, तिरस्कार और अनेक प्रकार के कष्ट देता है, फिर भी वे मानवता को प्रेम, सेवा, ज्ञान और प्रभु-नाम का अमृत बांटते रहते हैं। यही सच्चे संत का स्वरूप और धर्म का वास्तविक संदेश है।
प्रभु भक्तों को आध्यात्मिक भाव समझाते हुए उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि जब पूतना जैसी राक्षसी भगवान श्रीकृष्ण को विषपान कराने आई, तब भी प्रभु ने उसके अपराध को नहीं देखा, बल्कि उसके भीतर के मातृत्व भाव को स्वीकार करते हुए उसे मोक्ष प्रदान किया। यह परमात्मा की असीम करुणा और क्षमाशीलता का सर्वोच्च उदाहरण है।
उन्होंने आगे कहा कि गन्ने को जितना निचोड़ा जाता है, उतना ही मीठा रस निकलता है। चंदन को जितना घिसा जाता है, उतनी ही उसकी सुगंध फैलती है। दीपक स्वयं जलकर दूसरों के जीवन में प्रकाश भरता है और बेरी जितने पत्थर सहती है, उतने ही मीठे फल देती रहती है। धर्म भी मनुष्य को यही शिक्षा देता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी अपने श्रेष्ठ संस्कार, धैर्य और सेवा-भाव को कभी नहीं छोडऩा चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज छोटी-सी बात पर रिश्ते टूट जाते हैं, थोड़े से अपमान पर लोग वर्षों तक बैर पाल लेते हैं। लेकिन सच्चा धार्मिक व्यक्ति वही है, जो परिस्थितियां कैसी भी हों, अपने भीतर प्रेम, क्षमा और सहनशीलता को जीवित रखे।
प्रवचनों के समापन पर नवजीत भारद्वाज ने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जिस दिन हम पत्थरों के जवाब में भी प्रेम देना सीख जाएंगे, उसी दिन हमारे भीतर प्रभु का प्रकाश प्रकट हो जाएगा। यदि संसार आपको ठुकराए, तब भी सेवा मत छोड़िए। यदि लोग आपकी निंदा करें, तब भी सत्य का मार्ग मत छोडि़ए। यदि कोई आपका दिल दुखाए, तब भी प्रभु का नाम और भक्ति मत छोडि़ए।
उन्होंने कहा, *बेरी बनो… पत्थर सहकर भी मीठे फल दो। जो पत्थरों से टूट जाता है, वह साधारण इंसान है, लेकिन जो पत्थरों को भी प्रसाद मानकर मानवता को प्रेम, सेवा और सद्भाव का फल देता रहे, वही सच्चा संत* और प्रभु का वास्तविक भक्त कहलाने योग्य है।
इस अवसर पर समीर कपूर, विक्की अग्रवाल,प्रदीप,सौरभ भाटिया,बलजिंदर सिंह,रोहित भाटिया,नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत,दानिश,सौरभ ,शंकर,मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा, वरुण, नितिश,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , रवि भल्ला,जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक,दसोंधा सिंह, प्रिंस कुमार, दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।