दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्तों में कुछ सकारात्मक संकेत नजर आने लगे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत में प्रगति हो रही है और अब हालात ऐसे हैं कि टनल के अंत में रोशनी दिखाई देने लगी है। यह बातचीत सीधे नहीं, बल्कि तीसरे देशों के जरिए हो रही है। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान एक अहम भूमिका निभा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव में मुख्य तौर पर दो बड़ी बातें शामिल हैं पहली, Strait of Hormuz को फिर से खोलना और दूसरी, चल रहे युद्ध को खत्म करना।
यह प्रस्ताव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में से एक है। अगर इसे खोल दिया जाता है, तो वैश्विक ऊर्जा संकट में बड़ी राहत मिल सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान चाहता है कि पहले इस क्षेत्र में तनाव कम किया जाए और समुद्री रास्ते को सुरक्षित बनाया जाए, उसके बाद ही आगे की बातचीत हो। इस योजना के तहत ईरान ने यह भी सुझाव दिया है कि फिलहाल परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत को टाल दिया जाए। यानी पहले युद्धविराम या स्थायी शांति स्थापित की जाए और फिर न्यूक्लियर डील जैसे जटिल मुद्दों पर चर्चा की जाए। यह ईरान की एक रणनीतिक चाल मानी जा रही है, जिससे वह पहले अपने ऊपर लगे दबाव को कम करना चाहता है।अमेरिका की तरफ से भी कुछ संकेत मिले हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अगर ईरान बातचीत करना चाहता है, तो वह सीधे संपर्क कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है, लेकिन उन्होंने यह साफ कर दिया कि कोई भी समझौता अमेरिका के हितों को ध्यान में रखकर ही किया जाएगा। रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक लिखित संदेश भेजा है, जिसमें अपनी “रेड लाइन्स” यानी स्पष्ट शर्तें बताई गई हैं। इनमें खास तौर पर हॉर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।