
जिला बार एसोसिएशन, जालंधर के अध्यक्ष श्री आदित्य जैन एवं सचिव श्री रोहित गंभीर के नेतृत्व में आज अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी), जालंधर, सब-रजिस्ट्रार कार्यालय जालंधर-1 के तहसीलदार तथा सब-रजिस्ट्रार कार्यालय जालंधर-2 के तहसीलदार को एक विस्तृत प्रतिनिधित्व (Representation) सौंपा गया।
इस प्रतिनिधित्व में एसोसिएशन ने मांग की है कि मेमोरेंडम ऑफ इक्विटेबल मॉर्गेज (MODT) के रजिस्ट्रेशन के समय संपत्ति का अलग से फोटो तथा अलग से ग्रुप फोटो लगाने की जो प्रथा अपनाई जा रही है, उसकी वैधानिकता की जांच करवाई जाए। बार एसोसिएशन का कहना है कि इस संबंध में किसी भी कानून, नियम, सरकारी अधिसूचना अथवा एनजीडीआरएस (Easy Registry) प्रणाली में ऐसा कोई प्रावधान दिखाई नहीं देता, जिसके तहत ऐसे अतिरिक्त फोटो अनिवार्य हों।
एसोसिएशन ने अपने प्रतिनिधित्व में बताया कि पंजाब सरकार द्वारा लागू Easy Registry (NGDRS 3.0) प्रणाली का उद्देश्य रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल एवं भ्रष्टाचार मुक्त बनाना है। इस प्रणाली के अंतर्गत सभी आवश्यक दस्तावेज पहले ही ऑनलाइन अपलोड किए जाते हैं, उनकी जांच की जाती है, फीस ऑनलाइन जमा होती है तथा रजिस्ट्रेशन के समय दस्तावेज पर संबंधित पक्षों के फोटो पहले से ही मौजूद होते हैं। इसके अतिरिक्त रजिस्ट्रेशन के समय सिस्टम के माध्यम से पक्षकारों, गवाहों एवं सब-रजिस्ट्रार का डिजिटल ग्रुप फोटो भी लिया जाता है, जो रजिस्टर्ड दस्तावेज का हिस्सा बनता है। इसलिए अलग से संपत्ति का फोटो अथवा अतिरिक्त ग्रुप फोटो लेने की कोई आवश्यकता नहीं बनती।
बार एसोसिएशन ने यह भी कहा कि यदि बिना किसी कानूनी आधार के अतिरिक्त फोटो लगाने के लिए बाध्य किया जाता है तो इससे आम जनता, बैंकों, वित्तीय संस्थानों तथा अधिवक्ताओं को अनावश्यक परेशानी, समय की बर्बादी और अतिरिक्त आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ता है।
प्रतिनिधित्व में यह भी उल्लेख किया गया है कि बार एसोसिएशन को अपने कई सदस्यों से लिखित शिकायतें प्राप्त हुई हैं कि श्री राम भाटिया, जिन्हें कथित रूप से “ठेकेदार” बताया जाता है, अपने कुछ साथियों के साथ सब-रजिस्ट्रार कार्यालय जालंधर-1 एवं जालंधर-2 के आसपास मौजूद रहते हैं और रजिस्ट्रेशन से पहले पक्षकारों के अलग से ग्रुप फोटो खींचकर लगभग ₹400 प्रति फोटो वसूलते हैं। शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि यदि कोई पक्षकार या अधिवक्ता यह फोटो नहीं करवाना चाहता तो उसके साथ दबाव बनाया जाता है, दुर्व्यवहार किया जाता है तथा कई बार अभद्र भाषा का भी प्रयोग किया जाता है।
जिला बार एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि ये आरोप उसके सदस्यों से प्राप्त शिकायतों के आधार पर उठाए गए हैं और इनकी निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच करवाई जानी चाहिए। यदि जांच में शिकायतें सही पाई जाती हैं तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
बार एसोसिएशन ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि यदि अतिरिक्त फोटो लेना वास्तव में कानूनी रूप से आवश्यक है तो उससे संबंधित सरकारी आदेश, अधिसूचना, सर्कुलर अथवा कानूनी प्रावधान की प्रति उपलब्ध करवाई जाए। यदि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है तो सभी सब-रजिस्ट्रारों को निर्देश जारी किए जाएं कि वे केवल कानून एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही एमओडीटी का रजिस्ट्रेशन करें तथा किसी भी प्रकार के अतिरिक्त दस्तावेज या फोटो की अनावश्यक मांग न करें।
इसके साथ ही एसोसिएशन ने यह भी मांग की कि सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों के भीतर या आसपास किसी भी अनधिकृत निजी व्यक्ति को सरकारी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की अनुमति न दी जाए तथा अधिवक्ताओं एवं आम नागरिकों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानियों, अवैध मांगों या अतिरिक्त खर्च का सामना न करना पड़े।
जिला बार एसोसिएशन, जालंधर ने आशा व्यक्त की है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करेगा, ताकि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, कानून सम्मत तथा आम जनता के हित में संचालित हो सके।
इस अवसर पर जिला बार एसोसिएशन, जालंधर के अध्यक्ष श्री आदित्य जैन, सचिव श्री रोहित गंभीर सहित अधिवक्ता सलमान, सागर लाहौरिया, करनदीप सैनी, हर्ष, जयपाल शर्मा, राजीव सूरी, हरजोत सिंह कोहली, नकुल कोहली, रोहित मेहता, अमरिंदर सिंह थिंद, लक्ष्य शर्मा, सत्यम गुप्ता, अरुण गुप्ता, सुबोध शर्मा, ललित कक्कड़, शेखर भगत, रोहन कांत, विनय कांत, राकेश धीर, नवनीत सिंह कोहली, अपूर्व बख्शी, रवीना सेठी, काजल शर्मा, शब्बी पराशर, कुणाल गोयल, रोहित मसीह, राहुल नंदा, विकास गुप्ता, संदीप कालिया, सनी कुमार, एरिक, रॉबिन सेठी, अखिल चोपड़ा, भूपिंदर सिंह, धीरज भगत तथा हरमनजीत सिंह जोहल सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।