
जिसे एक शांत किंतु क्रांतिकारी पहल कहा जा सकता है, प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार ने समय के पहिए को पीछे मोड़ने का निर्णय लिया—वह भी अत्यंत गरिमामय ढंग से। उन्होंने डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर के सेवानिवृत्त शिक्षकों को एक अनौपचारिक मिलन समारोह हेतु आमंत्रित किया। न कोई एजेंडा था, न औपचारिक भाषणों का बोझ—केवल पुनः जुड़ने, उनकी बातें सुनने और उन महान शिक्षकों को यह अनुभूति कराने का एक सच्चा प्रयास था कि जिन्होंने इस संस्था की नींव रखी, वे आज भी इसके इतिहास और वर्तमान का अभिन्न अंग हैं।
यह विचार सरल होते हुए भी अत्यंत गहन था—उनका आशीर्वाद प्राप्त करना, उनके विशाल अनुभव से सीखना और सबसे बढ़कर उन्हें यह विश्वास दिलाना कि उनकी भूमिका आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। ऐसे समय में जब जीवन की गति अत्यधिक तेज़ हो चुकी है, यह ठहराव अत्यंत विचारपूर्ण और आवश्यक प्रतीत हुआ।
और वे सभी आमंत्रण स्वीकार कर उपस्थित हुए।
तीस से अधिक वरिष्ठ शिक्षक उन परिचित गलियारों में पुनः लौटे—कुछ के मन में पुरानी स्मृतियों की मिठास थी, तो कुछ के चेहरे पर पहचान की शांत मुस्कान। सबसे वरिष्ठ प्रो. जी.सी. मागो (88 वर्ष), अंग्रेज़ी विभाग के एक प्रतिष्ठित शिक्षक, अपनी उपस्थिति से शिक्षा जगत की गरिमा का प्रतीक बने। वहीं दूसरी ओर डॉ. पी.के. शर्मा, जो केवल चार महीने पूर्व ही सेवानिवृत्त हुए थे, अब भी उसी सक्रियता और अनुशासन के साथ उपस्थित रहे मानो वे आज भी नियमित रूप से कॉलेज आ रहे हों।
प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार ने सभी का आत्मीय स्वागत करते हुए उनकी उपस्थिति के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनका समय, उनका स्नेह और उनका निरंतर जुड़ाव संस्था के लिए अमूल्य धरोहर है।
कार्यक्रम का सफल समन्वय डॉ. कुॅंवर राजीव (उप-प्राचार्य एवं भौतिक विभागाध्यक्ष) द्वारा किया गया, जिन्होंने यह सुनिश्चित किया कि संपूर्ण आयोजन सहज और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो। कार्यक्रम का संचालन प्रो. शरद मनोचा ने किया। अपनी स्वाभाविक शैली से उन्होंने वातावरण को जीवंत, आत्मीय और आनंदपूर्ण बनाए रखा। उन्होंने स्मृतियों को उदासी का रूप लेने के बजाय सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित कर दिया।
स्वागत समिति में कॉलेज के वर्तमान प्रशासनिक एवं शैक्षणिक नेतृत्व के मुख्य सदस्य उपस्थित रहे। इनमें प्रो. सोनिका दानिया (उप-प्राचार्या एवं अंग्रेज़ी विभागाध्यक्ष), प्रो. अशोक कपूर (रजिस्ट्रार एवं वाणिज्य विभागाध्यक्ष), डॉ. मनु सूद (बर्सर एवं शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्ष), स्टाफ सचिव डॉ. ऋषि कुमार, संयुक्त स्टाफ सचिव साहिल नागपाल, स्टाफ प्रतिनिधि प्रो. मनोज कुमार, उप-रजिस्ट्रार प्रो. मनीष खन्ना तथा विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष शामिल थे। सभी ने मिलकर उन शिक्षकों का सम्मानपूर्वक स्वागत किया जिन्होंने कभी इन पदों पर रहकर संस्था को दिशा प्रदान की थी।
इस अवसर पर निम्नलिखित सेवानिवृत्त शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति रही:
जी.सी. मागो, एच.के. बजाज, बी.पी.एस. बेदी, संजीव शर्मा, रेनू गुप्ता, अर्चना ओबेरॉय, के.एल. सैनी, उषा उप्पल, अनुराग शर्मा, आर.डी. तिवारी, के.एल. आंगी, हेमंत कुमार, सतीश शर्मा, ए.जे. बहल, सी.जे. बहल, जी.सी. कौल, के.एन. कौल, ए.के. त्रिवेदी, वाई.आर. शर्मा, पी.सी. चोपड़ा, एस.के. मल्होत्रा, एफ.सी. शर्मा, एस.एम. शर्मा, सुरिंदर कौर, आर.सी. मोहिंदरू, के.के. प्लाहा, वी.के. सरीन, राजीव शर्मा, आशा वर्मा तथा पी.के. शर्मा।
इस मिलन समारोह में एक अत्यंत रोचक संयोग भी देखने को मिला। मुक्तसर के हरदीप सिंह बराड़, जो 1968 बैच के पूर्व छात्र हैं, अपने पुत्र के साथ कॉलेज परिसर भ्रमण हेतु आए हुए थे। अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियों से जुड़ी जगहों को देखकर वे इस कार्यक्रम की ओर आकर्षित हो गए। वहाँ उन्हें न केवल परिचित वातावरण मिला, बल्कि अतीत और वर्तमान को जोड़ने वाला एक जीवंत पुल भी दिखाई दिया। उनकी उपस्थिति ने आयोजन को एक विशेष और भावनात्मक आयाम प्रदान किया तथा यह संदेश दिया कि संस्थान केवल इमारतों से नहीं, बल्कि उन लोगों से बनते हैं जो उनसे जुड़ी स्मृतियों को जीवन भर संजोए रखते हैं।
कार्यक्रम का औपचारिक भाग ‘हॉल ऑफ फेम’ में आयोजित किया गया, जो इस अवसर के लिए पूर्णतः उपयुक्त स्थान सिद्ध हुआ। किंतु जैसा कि ऐसे आयोजनों में प्रायः होता है, वास्तविक आत्मीयता का आरंभ चाय के साथ हुई अनौपचारिक बातचीत से ही हुआ।
यह केवल चाय-नाश्ता नहीं था, बल्कि स्मृतियों का एक सजीव प्रवाह था। पुरानी घटनाएँ पुनः जीवंत हो उठीं, पुराने किस्सों को नए श्रोता मिले, और हँसी की गूँज में वर्षों पुरानी आत्मीयता स्पष्ट झलक रही थी। कुछ क्षणों के लिए ऐसा प्रतीत हुआ मानो समय ठहर गया हो।
अपने अतीत से पुनः जुड़कर डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य किया—उसने अपने वर्तमान को और अधिक सुदृढ़ बनाया तथा भविष्य के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया