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डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने ‘सेवा संकल्प’ के माध्यम से युवाओं को राष्ट्र-निर्माण में सबसे आगे रखा है; यह पहल प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों को समर्पित है

जालंधर: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और शासन यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर, संसद सदस्य (राज्यसभा) डॉ. अशोक कुमार मित्तल द्वारा ‘सेवा संकल्प – राष्ट्र-निर्माण के 25 साल’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके तहत युवाओं पर केंद्रित कई पहलें शुरू की गई हैं, जो सेवा और राष्ट्र-निर्माण की भावना को बढ़ावा देती हैं। छात्रों को भारत के लिए अपने विजन को व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करने से लेकर रचनात्मकता, नवाचार और सामुदायिक सेवा को बढ़ावा देने तक, इन कार्यक्रमों का उद्देश्य इस महत्वपूर्ण पड़ाव को उस युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं से जोड़ना है, जो देश के अगले अध्याय को आकार देगी और ‘विकसित भारत 2047’ के विजन में योगदान देगी।

इन पहलों में स्कूली स्तर की प्रतियोगिताएं, सरकारी योजनाओं से जुड़ी रचनात्मक गतिविधियां, नवाचार पर केंद्रित कार्यक्रम और रक्तदान शिविर शामिल हैं। ये सभी प्रयास इस महत्वपूर्ण पड़ाव को उस युवा पीढ़ी से जोड़ने के लिए हैं, जो भारत के भविष्य को संवारेगी। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को उस देश के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करना है जिसे वे बनाना चाहते हैं, और उन्हें यह समझने में मदद करना है कि वे देश की प्रगति में किन-किन तरीकों से योगदान दे सकते हैं।

इस जुड़ाव का एक बेहतरीन उदाहरण पंजाब के जालंधर स्थित सेंट जोसेफ स्कूल में आयोजित ‘मेरे सपनों का भारत’ कार्यक्रम था, जिसमें लगभग 2,500 छात्रों ने भाषण और चित्रकला प्रतियोगिताओं में भाग लिया। छात्रों से अपने सपनों के भारत की कल्पना करने के लिए कहा गया था। उन्होंने भाषणों और कलाकृतियों के माध्यम से अपनी आकांक्षाओं को व्यक्त किया, जिसमें स्वच्छ वातावरण, बेहतर शिक्षा, समानता, अवसर, दयालुता, नवाचार और राष्ट्रीय गौरव जैसे विषय शामिल थे। इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की भागीदारी ने इस पहल को युवाओं के लिए एक ऐसा महत्वपूर्ण मंच बना दिया, जहाँ वे देश के लिए अपने विजन को खुलकर सामने रख सके। छात्रों की प्रतिक्रिया पर विचार करते हुए, डॉ. मित्तल ने कहा, “मेरे लिए, यहीं पर ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना साकार होती है; उन बच्चों के सपनों में, जो इसे आकार देने में अपनी भूमिका की कल्पना करने लगे हैं।”

इस अभियान ने ‘सेवा के रंग, राष्ट्र के संग’ के माध्यम से राष्ट्रीय विकास के विषयों को रचनात्मक अभिव्यक्ति से जोड़ा। यह एक रंगोली पहल थी, जो सरकारी योजनाओं में झलकने वाले जन-कल्याण और प्रगति के विज़न पर केंद्रित थी।

इन प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए, ‘इनोवेशन चैलेंज’ (जिसे कार्यक्रम सूची में ‘इनोवेशन मैराथन’ भी कहा गया है) ने ‘सेवा संकल्प’ में विचारों पर आधारित एक नया आयाम जोड़ा। इस पहल ने राष्ट्र-निर्माण की चर्चा में नवाचार (इनोवेशन) और समस्या-समाधान को शामिल किया। इसने युवाओं को चुनौतियों का सामना करने और ऐसे समाधानों के बारे में सोचने के लिए प्रोत्साहित करने के महत्व को रेखांकित किया, जो भारत के भविष्य में योगदान दे सकें।

‘सेवा संकल्प’ के तहत युवाओं पर केंद्रित अन्य गतिविधियों, जैसे ‘आशीर्वाद का धागा’, ने भी युवाओं को राष्ट्र-निर्माण के विज़न से जोड़ने के व्यापक प्रयासों में योगदान दिया है।

चौथी पहल ने सेवा की भावना को केवल विचारों तक सीमित न रखकर उसे प्रत्यक्ष कार्य में बदल दिया। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में आयोजित रक्तदान शिविर ने लोगों को जीवन बचाने जैसे नेक काम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।

इन पहलों के व्यापक उद्देश्य पर बात करते हुए, डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने कहा, “राष्ट्र-निर्माण एक सामूहिक प्रयास है, जिसकी शुरुआत युवाओं के विचारों और आकांक्षाओं से होती है और जो समाज में योगदान देने की उनकी इच्छा से आगे बढ़ता है। ‘सेवा संकल्प’ का उद्देश्य भागीदारी और साझा जिम्मेदारी की इसी भावना को प्रोत्साहित करना है, ताकि भारत ‘विकसित भारत 2047’ की ओर आगे बढ़ सके।”

कुल मिलाकर, ये पहलें ‘सेवा संकल्प – राष्ट्र-निर्माण के 25 साल’ को जन-भागीदारी पर आधारित एक नया आयाम देती हैं। 25 साल का यह पड़ाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनसेवा की एक महत्वपूर्ण यात्रा को दर्शाता है। साथ ही, ये कार्यक्रम उस पीढ़ी की आकांक्षाओं और जिम्मेदारियों की ओर भी ध्यान दिलाते हैं, जो भारत को आगे ले जाएगी।

डॉ. मित्तल के लिए, इसका मुख्य महत्व ऐसे रास्ते तैयार करने में है, जिनसे युवा सीधे तौर पर राष्ट्रीय विकास से जुड़ सकें—चाहे वह भारत के लिए अपने दृष्टिकोण को सामने रखना हो, विकास की प्राथमिकताओं को समझना हो, नए विचारों की खोज करना हो, या दूसरों की भलाई के किसी कार्य में योगदान देना हो। जैसे-जैसे देश ‘विकसित भारत 2047’ की ओर बढ़ रहा है, ये पहलें आगे की इस यात्रा में जन-भागीदारी और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को केंद्र में रखती हैं।

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