


पंजाब में गंभीर एवं दीर्घकालिक बीमारियों, कैंसर, बुजुर्गों की बढ़ती संख्या और लंबे समय तक रहने वाले दर्द के मामलों को देखते हुए क्रॉनिक पेन मैनेजमेंट तथा पैलिएटिव केयर सेवाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है। इसी महत्वपूर्ण विषय पर पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पिम्स) में तीन दिवसीय राष्ट्रीय शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पंजाब मेडिकल कांउसिल के अंतर्गत एनजीओ अमृत केयर गिवर्स ने ग्लोबल पेन स्कूल, भोपाल, पेलियम इंडिया, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के जालंधर चैप्टर और पिम्स के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया। सम्मेलन में देशभर से 300 से अधिक डॉक्टरों और 50 नर्सों ने भाग लिया।तीन दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन इंटरवेंशनल पेन मैनेजमेंट पर प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप तथा नर्सिंग क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागियों के लिए विशेष प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप आयोजित की गई। इसके बाद दो दिनों तक क्रोनिक पेन और पेलिएटिव केयर पर कांफ्रेंस का आयोजन हुआ। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञों ने दर्द प्रबंधन, पैलिएटिव केयर, नर्सिंग, मानसिक स्वास्थ्य, पुनर्वास, गंभीर बीमारी तथा जीवन के अंतिम चरण में मरीजों की देखभाल सहित विभिन्न विषयों पर अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा की।
कार्यक्रम में ग्लोबल पेन स्कूल के निदेशक डॉ. रूपेश जैन के साथ डॉ. भुवना आहूजा, डॉ. विदुषी शर्मा, डॉ. नितेश अग्रवाल, डॉ. नेहा शर्मा और डॉ. नितिका मित्तल ने इंटरवेंशनल पेन मैनेजमेंट वर्कशॉप में प्रशिक्षण प्रदान किया।
नर्सिंग वर्कशॉप में केनस्पोर्ट की सिस्टर सविता तथा ऑल इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसंस की सिस्टर नीलिमा ने पैलिएटिव केयर में नर्सिंग की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रशिक्षण दिया।
राष्ट्रीय सम्मेलन में डॉ. रूप कुमार गुरसहानी, डॉ. संतोष चतुर्वेदी, डॉ. ध्वनि मेहता, डॉ. आर.के. मणि, डॉ. सविता बुटोला, डॉ. गायत्री पालट, डॉ. नरेश आनंद, डॉ. पंकज सोनी, डॉ. रुचि गुप्ता, डॉ. हरमीत रियायत, डॉ. बुरहान वानी, डॉ. अब्राहम, डॉ. अर्चना दत्ता और डॉ. मिनी अरोड़ा सहित अनेक विशेषज्ञों ने पैलिएटिव केयर और क्रॉनिक पेन मैनेजमेंट से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए।
एनजीओ अमृत केयर गिवर्स की संस्थापक डॉ. रुचि सिंह गौर और सह-संस्थापक डॉ. अभिलक्ष्य ने कहा कि पंजाब में पैलिएटिव केयर को केवल अस्पतालों तक सीमित रखने के बजाय समुदाय और घर-आधारित देखभाल तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। मरीज के साथ-साथ उसके परिवार और देखभालकर्ता (केयर गिवर्स ) को भी उचित मार्गदर्शन, दर्द से राहत तथा मानसिक एवं भावनात्मक सहयोग मिलना चाहिए। सम्मेलन का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि पंजाब में क्रॉनिक पेन और पैलिएटिव केयर सेवाओं को अधिक सुलभ बनाया जाएगा, ताकि मरीजों को केवल उपचार ही नहीं, बल्कि दर्द से राहत, गरिमा और बेहतर जीवन गुणवत्ता भी प्रदान की जा सके।आयोजकों ने पंजाब मेडिकल काउंसिल की उपाध्यक्ष डॉ. जैस्मिन दहिया के निरंतर सहयोग, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के लिए विशेष आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर आईएमए जालंधर के अध्यक्ष डॉ. धीरज भाटिया, पिम्स के प्रिंसिपल डॉ. राजीव अरोड़ा, निदेशक डॉ. कंवलजीत सिंह तथा पिम्स प्रबंधन का भी विशेष धन्यवाद किया गया।कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. अदिति जग्गी, डॉ. विभा महाजन, डॉ. अर्चना दत्ता, डॉ. बुरहान वानी, डॉ. नीतू पांडे, डॉ. निखिल मेहता, अरुश पसरीचा, डॉ. गुरकीरत सिंह बेदी, डॉ. अंकुर हस्तिर, डॉ. शैलजा शर्मा, डॉ. सागरिका, डॉ. शुचिन मंगला, डॉ. गौरव सिंह, डॉ. अंकुश मल्होत्रा, डॉ. दीपिंदर कौर, डॉ. अभिलक्ष्य ज्योति, डॉ. ओंकार सिंह, डॉ. एंजेलिना रेखी, डॉ. भाविका सिंगला, डॉ. सृष्टि जिंदल, शशि कुमार, अंजलि वर्मा और नैना सहित पूरी कोर टीम, स्वयंसेवकों और सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।


