दिव्य ज्योति जागृति संस्थान (DJJS) द्वारा 14 अप्रैल से 20 अप्रैल तक सायं 7 बजे से 10 बजे तक रोशन ग्राउंड , होशियारपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत साप्ताहिक कथा का भव्य एवं सफल आयोजन सम्पन्न हुआ। इस पावन कथा के विश्राम उपरांत वैदिक परंपरा के अनुसार विधि-विधान से हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। शास्त्रों के अनुसार कथा का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब हवन यज्ञ पूर्ण रूप से सम्पन्न किया जाए, इसी भावना के साथ श्रद्धालुओं ने इस यज्ञ में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
कथा के विश्राम के पश्चात आयोजित हवन यज्ञ में विश्व विख्यात भागवत भास्कर साध्वी सुश्री वैष्णवी भारती जी और सभी श्रद्धालुओं ने पूर्ण आहुति अर्पित की। यज्ञ के दौरान पूरे वातावरण में मंत्रोच्चारण की मधुर ध्वनि और भक्ति भाव की अनुभूति हो रही थी। उपस्थित संगत ने अत्यंत श्रद्धा, विश्वास और समर्पण के साथ इस यज्ञ को पूर्ण किया। हर किसी के चेहरे पर आध्यात्मिक संतोष और आनंद की झलक स्पष्ट दिखाई दे रही थी।
भागवत कथा में जसपाल सिंह चैची ( जिला प्रधान और चेयरमैन मार्केट कमेटी),स्वामी सज्जनानंद,मुनीश गुप्ता (मुख्य यजमान),कुशा गुप्ता, जगदीश अग्रवाल,वैष्णवी भारती जी, साध्वी शंकरप्रीता भारती जी,पुन्या भारती जी, सर्वाशा भारती जी, आहुति भारती जी, अखंडज्योति भारती जी, ऋचा भारती जी, बीना भारती जी, शब्दप्रिया भारती जी, मनजिंदर भारती जी,साध्वी राजवंत भारती जी, साध्वी मीमांसा भारती जी,साध्वी रेणु भारती जी,साध्वी रणे भारती जी, साध्वी राजविद्या भारती जी,साध्वी पूनम भारती जी,
स्वामी यशेश्वरानंद जी, स्वामी विनयानंद जी, स्वामी कुलबीरानंद जी,स्वामी मेघानंद जी,महात्मा नरेश जी,महात्मा वरिंदर जी, महात्मा गुरबाज जी,महात्मा सतनाम जी,पूरी टीम ने भी इस हवन यज्ञ में सक्रिय सहभागिता निभाई और आयोजन को सफल बनाने में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान किया। कथा के दौरान जिस समर्पण भाव से सेवा की गई, उसी भाव से यज्ञ में भी सभी ने अपनी भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के उपरांत नगर के सभी निवासियों एवं सेवाधारियों द्वारा कथा टीम को भावभीनी विदाई दी गई। “जय श्री कृष्ण” के गगनभेदी जयकारों से पूरा पंडाल गूंज उठा और वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो गया। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को कथा की सफलता की बधाई भी दी।
अंत में सभी श्रद्धालुओं ने हवन यज्ञ का पवित्र प्रसाद ग्रहण किया तथा सामूहिक रूप से लंगर का आनंद लिया। इस आयोजन ने न केवल आध्यात्मिक ज्ञान का प्रसार किया, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और एकता का संदेश भी दिया। यह सम्पूर्ण कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और समर्पण का अद्भुत उदाहरण बनकर सभी के हृदय में अपनी अमिट छाप छोड़ गया।