
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा स्थानीय होटल मेरिटन, जालंधर में “कृष्णं वंदे जगद्गुरुम” नामक भव्य भजन संध्या का आयोजन श्रद्धा एवं उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम में शहर के गणमान्य व्यक्तियों एवं श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर आध्यात्मिक वातावरण का आनंद लिया।
भजन संध्या के शुभारंभ पर गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी परमानंद जी, स्वामी सदानंद जी, स्वामी सज्जनानंद जी, जालंधर शाखा प्रमुख साध्वी पल्लवी भारती जी, साध्वी शशि भारती जी, गौतम कुकरेजा, गौरव कुकरेजा, इंद्रपाल मरवाहा, SDM Shubhi Angra, जालंधर कैंट के CEO तथा ब्रिगेडियर सुनील सोल द्वारा संयुक्त रूप से ज्योति प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
इसके पश्चात भजन संध्या का मनमोहक कार्यक्रम आरंभ हुआ, जिसमें भजनों की मधुर प्रस्तुति ने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कार्यक्रम के दौरान साध्वी जयंती भारती जी ने अपने प्रेरणादायक एवं आध्यात्मिक विचारों द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि श्रीकृष्ण ने सदैव समाज को प्रेम, समानता और कर्तव्य का संदेश दिया। उन्होंने सुदामा प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने निर्धन मित्र सुदामा को गले लगाकर यह संदेश दिया कि सच्चे संबंध धन-दौलत नहीं, बल्कि प्रेम और संवेदनाओं से बनते हैं। आज के समाज में यह प्रसंग हमें वर्गभेद मिटाकर मानवता, मित्रता और सेवा भावना को अपनाने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय में व्यक्ति भौतिक सुखों के पीछे भागते हुए रिश्तों और संस्कारों से दूर होता जा रहा है, जबकि श्रीकृष्ण का जीवन हमें समाज को साथ लेकर चलने, परस्पर सहयोग और नैतिक मूल्यों को अपनाने की शिक्षा देता है। उन्होंने सभी को गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी द्वारा प्रदान किए जा रहे ब्रह्म ज्ञान के माध्यम से ईश्वर साक्षात्कार कर जीवन का वास्तविक कल्याण करने का संदेश भी दिया। साथ ही उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखते हुए बताया कि ध्यान एवं आध्यात्मिक साधना मनुष्य के मानसिक तनाव को कम करने, सकारात्मक सोच बढ़ाने तथा जीवन में संतुलन स्थापित करने में सहायक सिद्ध होती है। आज विश्वभर में वैज्ञानिक शोध भी यह स्वीकार कर रहे हैं कि मेडिटेशन एवं आध्यात्मिक अभ्यास व्यक्ति के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
कृष्णं वंदे जगद्गुरुम के भजन पर सारा पंडाल झूम उठा। भक्तिमय भजनों ने पूरे वातावरण को कृष्णमय बना दिया। श्रद्धालु भक्ति रस में डूबकर झूम उठे तथा पूरे सभागार में आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा। कार्यक्रम के अंत में स्वामी सज्जनानंद जी ने सभी उपस्थित अतिथियों एवं श्रद्धालुओं का धन्यवाद किया गया। साध्वी पल्लवी भारती जी द्वारा मानवता के उत्थान हेतु संस्थान द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न सामाजिक एवं आध्यात्मिक कार्यों की जानकारी भी दी गई।