चंडीगढ़/पंजाब:
मानव अधिकार परिषद भारत की अध्यक्ष एवं भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष *श्रीमती आरती राजपूत* ने पंजाब में गहराते नशे के संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री श्री *अमित शाह* और भाजपा आलाकमान को एक भावुक पत्र लिखकर सुझाव दिया है कि आगामी चुनावों के लिए पार्टी के घोषणा-पत्र में ‘नशा मुक्त पंजाब’ को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
पंजाब की पीड़ा: एक सामाजिक चुनौती
आरती राजपूत ने कहा कि पंजाब आज जिस मोड़ पर खड़ा है, वहां नशा केवल एक समस्या नहीं बल्कि एक महामारी बन चुका है। उन्होंने कहा, *”गांव-गांव में युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। हजारों परिवार उजड़ चुके हैं और माताएं अपने बच्चों को खोने के डर में जी रही हैं। यह समय पंजाब की रगों में जहर घोलने वाले इस जाल को काटने का है।”*
घोषणा-पत्र के लिए प्रमुख सुझाव
उन्होंने भाजपा नेतृत्व को सुझाव दिया है कि पंजाब के भविष्य को बचाने के लिए चुनावी संकल्प पत्र में निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल करना अनिवार्य है:
गांव स्तर पर पुनर्वास: हर गांव में आधुनिक नशामुक्ति केंद्रों की स्थापना।
विशेषज्ञों की नियुक्ति: केंद्रों में प्रशिक्षित डॉक्टरों, काउंसलरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपलब्धता।
रोजगार के अवसर: नशे से दूर रहने वाले युवाओं के लिए विशेष कौशल विकास और नौकरियों का प्रावधान।
शिक्षा में सुधार: स्कूलों और कॉलेजों में ‘नशा विरोधी शिक्षा’ को अनिवार्य पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना।
कठोर कार्रवाई: ड्रग्स तस्करी और सिंडिकेट पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत सख्त कार्रवाई।
स्वस्थ जीवन: खेल, योग और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए बुनियादी ढांचे का विकास।
मानव अधिकार परिषद का पूर्ण समर्थन
आरती राजपूत ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक राजनीतिक सुझाव नहीं, बल्कि पंजाब के हर पीड़ित परिवार की पुकार है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि यदि भारतीय जनता पार्टी इस दिशा में ठोस नीति बनाती है, तो *मानव अधिकार परिषद भारत* इस अभियान को जन-जन तक पहुँचाने में पूर्ण सहयोग देगी।
“हमें राजनीति से ऊपर उठकर पंजाब के युवाओं का जीवन बचाना होगा। एक सशक्त नीति ही पंजाब के गौरव को वापस लौटा सकती है।” — आरती राजपूत