भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व आईएएस अधिकारी श्री एस. आर. लधर ने राज्य चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन बूथ नंबरों, वोटर नंबरों तथा प्रस्तावक और समर्थक के विवरण में अचानक किए गए बदलावों ने उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के सामने अभूतपूर्व संकट खड़ा कर दिया है।

उन्होंने कहा कि 5 मई 2026 को मतदाता सूचियों को फ्रीज़ करने और नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद इस प्रकार बूथ नंबरों और वोटर विवरणों में फेरबदल करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है। इससे उम्मीदवारों, प्रस्तावकों और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं में भारी भ्रम और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। जिला प्रशासनिक कार्यालयों में अफरा-तफरी का माहौल है और उम्मीदवार आवश्यक दस्तावेजों की पुनः जांच के लिए परेशान हो रहे हैं।

श्री लधर ने कहा कि वे स्वयं ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के निदेशक रह चुके हैं तथा पंचायत चुनावों का सफल संचालन कर चुके हैं, लेकिन अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव में उन्होंने इस प्रकार की अव्यवस्था और अराजकता कभी नहीं देखी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह केवल अक्षमता और प्रशासनिक विफलता है या फिर जानबूझकर किसी विशेष राजनीतिक दल, विशेषकर आम आदमी पार्टी, को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है?

उन्होंने कहा कि पहले राज्य चुनाव आयोग ने अचानक ईवीएम प्रणाली छोड़कर बैलेट पेपर से चुनाव करवाने का निर्णय लिया और अब बूथ एवं मतदाता विवरणों में बदलाव कर पूरी चुनाव प्रक्रिया को संदेह के घेरे में ला दिया है। इससे चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।

श्री लधर ने कहा कि एक पूर्व प्रशासक होने के नाते उन्हें अत्यंत पीड़ा और शर्म महसूस हो रही है कि जिस प्रशासनिक व्यवस्था का वे कभी हिस्सा रहे, वही व्यवस्था आज लोकतांत्रिक प्रक्रिया को इतनी अव्यवस्थित और अविश्वसनीय बना रही है।

उन्होंने राज्य चुनाव आयोग से तुरंत स्थिति स्पष्ट करने, सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को संशोधित सूचियों की प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध करवाने तथा चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।