
पंजाब में एसआईआर विपक्ष को स्वीकार है, तो दूसरे राज्यों में इस पर आपत्ति क्यों? सुनील जाखड़ का सवाल*

चंडीगढ़, 14 अक्टूबर ( ): पंजाब भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने आज कांग्रेस पर आरोप लगाया कि देशभर में अपना जनाधार खोने के बाद वह चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रही है। पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पूरा हो चुका है, लेकिन इसी कांग्रेस ने यहां इस प्रक्रिया पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
जाखड़ ने नियमों के अनुसार मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण पूरा करने के लिए पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की सराहना की। पंजाब कांग्रेस के मौजूदा और पूर्व प्रदेश अध्यक्षों, मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री और आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष के विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं के आंकड़े साझा करते हुए उन्होंने कहा कि इनमें से किसी भी नेता ने न तो अपने विधानसभा क्षेत्र में और न ही राज्य में इस प्रक्रिया पर कोई आपत्ति जताई।
जाखड़ ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के लिए पंजाब में राजनीतिक दलों ने मिलकर 89 हजार बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) नियुक्त किए थे। उनके अनुसार, चुनाव आयोग ने प्रत्येक चरण में इन एजेंटों के साथ जानकारी साझा की और प्रक्रिया के संबंध में उनकी लिखित सहमति भी ली। उन्होंने दावा किया कि पूरी प्रक्रिया के दौरान पंजाब में एक भी पात्र मतदाता सामने आकर यह नहीं कह सका कि उसका नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से काटा गया है।
भाजपा नेता ने कहा कि इसके बावजूद पंजाब कांग्रेस के नेता एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शन करने दिल्ली जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेताओं ने भी 10 अक्टूबर को चंडीगढ़ में इस प्रक्रिया के खिलाफ प्रदर्शन किया, जबकि 12 अक्टूबर को दोनों दलों के प्रतिनिधि मुख्य निर्वाचन अधिकारी का धन्यवाद करके आए थे।
जाखड़ ने कहा कि विपक्ष अपना खोया जनाधार वापस पाने के लिए इस प्रक्रिया को राजनीतिक मुद्दा बना रहा है, जबकि उनके अनुसार यह पूरे देश में एक समान प्रक्रिया के तहत हो रही है और इस तरह के पुनरीक्षण पहले भी कई बार हो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकांश राज्यों में कांग्रेस के पास जमीनी स्तर पर कार्यकर्ता नहीं हैं और वह उन क्षेत्रों में बीएलए भी नियुक्त नहीं कर पाई। उन्होंने कहा कि अपना संगठन मजबूत करने के बजाय कांग्रेस अपनी पूरी ताकत संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने में लगा रही है।
जाखड़ ने सवाल किया, “जब पंजाब में एसआईआर सही तरीके से पूरा हो गया है, तो उन्हीं नियमों के तहत दूसरे राज्यों में हो रही यही प्रक्रिया गलत कैसे हो सकती है?”
उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से काटा गया है, तो ऐसा मामला सामने लाया जाए। उन्होंने दोहराया कि पात्र मतदाताओं के नाम अब भी मतदाता सूची में दर्ज करवाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा, “एसआईआर का मतलब वोट काटना नहीं, बल्कि मतदाता सूचियों में सुधार और उन्हें अद्यतन करना है।”
कांग्रेस के उन राज्यसभा नेताओं पर तंज कसते हुए, जो अब भी पार्टी में फैसले ले रहे हैं, जाखड़ ने कहा कि जिन्होंने कभी चुनाव लड़े बिना अपना पूरा राजनीतिक जीवन राज्यसभा में बिता दिया, उन्हें क्या पता कि मतदाताओं के नाम सूची में कैसे दर्ज होते हैं।
उन्होंने सवाल किया कि मृत मतदाताओं, अपना निवास स्थान बदल चुके मतदाताओं के नाम हटाना या दोहरी प्रविष्टियों में से एक को हटाना गैरकानूनी कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा कि असली सवाल यह है कि क्या किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से काटा गया है। ऐसे मतदाता सामने आएं ताकि चुनाव आयोग उनका नाम दोबारा मतदाता सूची में दर्ज कर सके।
*जाखड़ ने परमिंदर सिंह झोटा की हत्या की निंदा की, नशा तस्करों को सरकारी संरक्षण मिलने का आरोप लगाया*
मानसा में परमिंदर सिंह झोटा की हत्या पर दुख जताते हुए सुनील जाखड़ ने कहा कि भगवंत सिंह मान मुख्यमंत्री कहलाने का अधिकार खो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के संरक्षण में नशा बिक रहा है। जाखड़ ने सवाल किया कि झोटा की हत्या के आरोपी के खिलाफ चार मामले दर्ज होने के बावजूद उसका हथियार लाइसेंस कैसे बन गया। उन्होंने पूछा कि क्या यह इस बात का संकेत नहीं है कि नशा तस्करों को सरकारी संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार का एजेंडा समाज में इतना डर पैदा करना है कि कोई भी आवाज उठाने की हिम्मत न करे और जिसे उन्होंने उसका “लूट का तंत्र” बताया, वह चलता रहे।



