जालंधर, 30 अप्रैल, 2026 : फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली के ऑर्थोपेडिक्स स्पाइन विभाग के स्कोलियोसिस डिवीज़न ने पीडियाट्रिक स्पाइनल डिफॉर्मिटीज़’ (बच्चों की रीढ़ की हड्डी से जुड़ी गंभीर बीमारी ) का सफल इलाज कर उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव लाया है। यहां डॉक्टरों ने कई जटिल और चुनौतीपूर्ण सर्जरी की हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में खास उपलब्धि माना जा रहा है।

अस्पताल के एडिशनल डायरेक्टर डॉ. दीपक जोशी और उनकी टीम ने काइफोसिस, स्कोलियोसिस और जन्म से जुड़ी रीढ़ की समस्याओं से पीड़ित बच्चों का इलाज किया है।

एक मामले में, जालंधर की 5 साल की बच्ची जन्म से ही कमर के नीचे के हिस्से में टेढ़ेपन (काइफोसिस) से पीड़ित थी । उसकी रीढ़ की हड्डी का निचला हिस्सा सही तरह से विकसित नहीं हुआ था, जिससे उसकी कमर में कूबड़ बन गया था। अगर समय पर इलाज नहीं होता, तो यह समस्या और गंभीर हो सकती थी। डॉ. जोशी की टीम ने करीब 4 घंटे चली सर्जरी में खराब हड्डी को ठीक कर रीढ़ को सीधा किया और स्क्रू की मदद से उसे स्थिर किया। ऑपरेशन के बाद बच्ची की हालत तेजी से सुधरी और तीन दिन में ही उसे छुट्टी दे दी गई। आज वह पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रही है। 19 साल की एक लड़की को स्कोलियोसिस की समस्या थी, जिसमें जाती है और शरीर टेढ़ा दिखाई देने लगता है। जांच के बाद उसकी करीब 3 घंटे चली। सर्जरी के तीन दिन बाद ही मरीज चलकर घर चल वाई में भी करीब 3 इंच का सुधार हुआ।

बताया कि काइफोसिस और स्कोलियोसिस जैसी बीमारियां कई बा ल पातीं, लेकिन इलाज में देरी होने पर यह गंभीर रूप ले सकती हैं काम पर असर डाल सकती हैं। उन्होंने कहा कि छोटी समस्या का सकता है, जबकि बड़ी समस्या में सर्जरी जरूरी होती है। फोर्टिस आधुनिक तकनीक और उच्च स्तर की सुविधा के साथ की जा रही