
विद्यालय प्रबंधन प्रधानाचार्या श्रीमती प्रवीण सैली के नेतृत्त्व में सीबीएसई परिपत्र के अनुसार ‘भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर’ (बीबीएससी-2026) का आयोजन किया गया, जिसमें “एक और भारतीय भाषा सीखें” के अंतर्गत साप्ताहिक गतिविधियाँ आयोजित की गईं। विद्यार्थियों में बहुभाषावाद, सांस्कृतिक ज्ञान और संचार-कौशल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की गईं। शिविर का उद्देश्य आनंददायक अनुभवों के साथ “एक और भारतीय भाषा सीखें” की भावना को बढ़ावा देना था। विद्यार्थियों ने गृहराज्य पंजाब को चुनकर, मातृभाषा पंजाबी से संबंधित निम्न गतिविधियों में भाग लिया-
• नौवीं कक्षा के छात्रों ने बोलने, सुनने और आत्माभिव्यक्ति कौशल को विकसित करने के उद्देश्य से “मेरी पहचान” गतिविधि में भाग लिया। उन्होंने पंजाबी भाषा में अपना नाम, रोल नंबर और हस्ताक्षर इत्यादि साँझा करते हुए अपना-अपना परिचय दिया।
• नौवीं और बारहवीं कक्षा के छात्रों ने पंजाब की समृद्ध लोक-संस्कृति और संगीतमय विरासत से परिचित होते हुए पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्रों के साथ विभिन्न पंजाबी लोकगीत प्रस्तुत किए। उन्हें लोकगीतों, पंजाबी संस्कृति में उनकी भूमिका और पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्रों के महत्त्व के बारे में भी बताया गया।
• नौवीं और दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों ने “पंजाबी व्यंजन और स्थानीय मसालों” पर आधारित गतिविधि के माध्यम से विभिन्न खाद्य-पदार्थों और मसालों का अवलोकन किया और उनके उपयोग और महत्त्व के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्राप्त की। उन्हें बताया गया कि वास्को डी गामा के भारत पहुँचने पर किस प्रकार मसाला व्यापार के लिए नए रास्ते खुले थे।
• नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए “सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियम” पर आधारित एक विशेष जागरूकता गतिविधि का भी आयोजन किया गया जिसमें पंजाबी भाषा में चार्ट और पोस्टर बनाकर विद्यार्थियों ने आवश्यक सड़क-सुरक्षा उपायों और यातायात -नियमों के पालन के लिए सभी को जागरूक किया।
• दसवीं कक्षा के छात्रों के लिए पंजाब के महान नायक ‘हरि सिंह नलवा’ के जीवन और उपलब्धियों पर एक ‘लघु-कहानी सत्र’ आयोजित किया गया। छात्रों ने साहस, नेतृत्त्व और देशभक्ति के लिए विख्यात, महाराजा रणजीत सिंह की सेना के प्रसिद्ध कमांडर हरि सिंह नलवा की प्रेरक जीवनी, सिख साम्राज्य में उनके महत्वपूर्ण योगदान और पंजाब की उत्तर-पश्चिमी सीमाओं की सुरक्षा में उनकी भूमिका के बारे में बताते हुए उनकी शौर्य-कथा सुनाई।
• कक्षा नौवीं और दसवीं के विद्यार्थियों के लिए “पंजाब की भूमि और नदियाँ” विषय पर आधारित एक अन्य गतिविधि के माध्यम से छात्रों को पंजाब की भौगोलिक विरासत की विशेषताओं से परिचित कराया गया। उन्हें पंजाब के उपजाऊ मैदान, प्रमुख नदियाँ, कृषि, अर्थव्यवस्था और संस्कृति में बारे में बताया गया, जिसके फलस्वरूप विद्यार्थियों में, पंजाब की पाँच नदियों के प्राकृतिक संसाधनों के बारे में गहरी समझ विकसित हुई।
• कक्षा नौवीं के विद्यार्थियों के लिए ‘टंग ट्विस्टर’ गतिविधि का भी आयोजन किया गया जिसमें विद्यार्थियों ने पंजाबी भाषा में शुद्व उच्चारण, प्रवाह और बोलने के कौशल को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के ‘पंजाबी टंग ट्विस्टर्स’ का अभ्यास किया, इससे पंजाबी भाषा का उपयोग करने में उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा और उच्चारण करने की क्षमता भी विकसित हुई।
● प्रधानाचार्या श्रीमती प्रवीण सैली ने बताया कि विद्यार्थियों ने मार्गदर्शक अध्यापको के उल्लेखनीय सहयोग से ‘भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर’ में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसके अंतर्गत करवाई गईं विभिन्न गतिविधियाँ भाषायी कौशलों के विकास में अत्यंत सहायक सिद्ध हुईं। डॉ. विदुर ज्योति,चेयरमैन ट्रस्ट, डॉ. सुविक्रम ज्योति, चेयरमैन कम मैनेजर, मैनेजिंग कमेटी; जनरल सैक्रेटरी ट्रस्ट, उपप्रधानाचार्या श्रीमती रमनदीप तथा सहायक उपप्रधानाचार्या श्रीमती ममता अरोड़ा ने भी विद्यार्थियों तथा पंजाबी-विभाग के मार्गदर्शक अध्यापकों के प्रयासों की सराहना की।