
सीटी ग्रुप और आईआईटी दिल्ली की साझेदारी से मजबूत होगी डिजिटल प्रायोगिक शिक्षा

जालंधर: सीटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, मकसूदां, जालंधर ने भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की वर्चुअल लैब्स पहल के तहत आईआईटी दिल्ली के साथ सहयोग किया है। यह पहल राष्ट्रीय सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी मिशन (NMEICT) के माध्यम से लागू की जा रही है। इस सहयोग के तहत सीटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस को आईआईटी दिल्ली के अधीन वर्चुअल लैब्स के नोडल केंद्र के रूप में नामित किया गया है।
वर्चुअल लैब्स पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को तकनीक-सक्षम प्रायोगिक शिक्षा और वर्चुअल प्रयोगों तक पहुंच प्रदान करना है। इंटरैक्टिव डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विद्यार्थी विभिन्न प्रयोगों को समझने और करने का अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। यह पहल पारंपरिक प्रयोगशाला शिक्षा को पूरक बनाते हुए विद्यार्थियों की तकनीकी विषयों की व्यावहारिक समझ को मजबूत करने में सहायक होगी।
नोडल केंद्र के रूप में सीटी ग्रुप विद्यार्थियों और शिक्षकों को विभिन्न तकनीकी एवं शैक्षणिक क्षेत्रों से संबंधित वर्चुअल लैब्स और प्रयोगों तक पहुंच उपलब्ध करवाएगा। इसके साथ ही, केंद्र को पहल के तहत आवश्यक तकनीकी एवं संचालन संबंधी सहायता भी प्रदान की जाएगी, जिससे शिक्षण एवं अधिगम में इस प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके।
सीटी ग्रुप विभिन्न शैक्षणिक पहलों के माध्यम से तकनीक आधारित शिक्षा को निरंतर बढ़ावा दे रहा है। आईआईटी दिल्ली के साथ यह सहयोग शिक्षा में डिजिटल साधनों, अनुभवात्मक अधिगम और नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों को एकीकृत करने के संस्थान के प्रयासों को और मजबूत करेगा।
इस सहयोग पर सीटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, मकसूदां के कैंपस डायरेक्टर, डॉ. अनुराग शर्मा ने कहा, “आईआईटी दिल्ली के साथ सहयोग और हमारे संस्थान को वर्चुअल लैब्स नोडल केंद्र के रूप में नामित किया जाना प्रायोगिक एवं तकनीक-सक्षम शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वर्चुअल लैब्स हमारे विद्यार्थियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रयोगों को समझने और अनुभव करने का अवसर प्रदान करेंगी तथा उनकी पारंपरिक प्रयोगशाला शिक्षा को और प्रभावी बनाएंगी। हम विद्यार्थियों के लिए अनुभवात्मक एवं नवाचार आधारित शिक्षा के अधिक अवसर सृजित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
यह सहयोग सीटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, मकसूदां द्वारा अनुभवात्मक अधिगम, डिजिटल शिक्षा और तकनीक-सक्षम शैक्षणिक पद्धतियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को नवीन शिक्षण संसाधनों और प्रायोगिक शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।



