
जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में मां बगलामुखी जी के निमित सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान
से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध माँ बगलामुखी धाम में आयोजित दिव्य हवन-यज्ञ के पावन अवसर पर प्रेरक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज ने माँ भक्तों को अपने ओजस्वी और भावपूर्ण प्रवचनों से मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान उन्होंने एक अत्यंत मनोहारी और प्रासंगिक दोहे के माध्यम से भक्ति का संदेश दिया
*‘‘चाँद दरस की आस में, चकोर लगाए नैन।*
*जैसे भक्त प्रतीक्षा करे, प्रभु दर्शन के चैन॥’’*
नवजीत भारद्वाज ने कहा कि यह सृष्टि केवल दिखाई देने वाली वस्तुओं का संसार नहीं है, बल्कि हर दृश्य के पीछे एक गहरा आध्यात्मिक संदेश छिपा हुआ है। प्रकृति की हर घटना हमें जीवन का कोई न कोई रहस्य समझाती है। प्रकृति में चकोर और चाँद की कथा भी इसी गूढ़ सत्य को दर्शाती है।
उन्होंने बताया कि मान्यता है कि चकोर पक्षी पूरी रात आकाश की ओर टकटकी लगाकर चाँद का इंतजार करता है। उसकी आँखों में केवल एक ही चाह होती है चाँद का दीदार। वह धरती पर रहते हुए भी अपनी दृष्टि आसमान पर टिकाए रखता है।
नवजीत भारद्वाज ने कहा कि यह कथा केवल एक पक्षी और चाँद की कहानी नहीं है, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस कथा में चकोर हमारी आत्मा का प्रतीक है और चाँद परमात्मा के दिव्य प्रकाश का। जिस प्रकार चकोर चाँद के बिना अधूरा महसूस करता है, उसी प्रकार हमारी आत्मा भी परमात्मा के बिना अधूरी है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य इस संसार में धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा, रिश्तों और सुख-सुविधाओं में सुख खोजता है, लेकिन एक समय ऐसा आता है जब सब कुछ होते हुए भी भीतर एक खालीपन महसूस होता है। इसका कारण यह है कि आत्मा का वास्तविक भोजन ईश्वर का प्रेम और उसका स्मरण है। जब तक आत्मा को वह दिव्य प्रकाश नहीं मिलता, तब तक मनुष्य का मन बेचैन ही रहता है।
नवजीत भारद्वाज जी ने सरल शब्दों में समझाया कि जब रात गहरी होती है, तभी चाँद की चाँदनी सबसे अधिक सुंदर लगती है। उसी प्रकार जब जीवन में दुख, संकट और अंधकार आता है, तब मनुष्य को ईश्वर की याद और भी गहराई से आती है। कई बार दुख भी भगवान की कृपा का ही रूप होता है, क्योंकि वही हमें उसके करीब लाता है।
नवजीत भारद्वाज ने कहा कि चकोर की सबसे बड़ी विशेषता उसका धैर्य है। वह पूरी रात इंतजार करता है न शिकायत करता है, न थकता है और न हार मानता है। बस उसकी आँखें आसमान पर टिकी रहती हैं। यही संतों का मार्ग है भक्ति, धैर्य और प्रतीक्षा। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक मार्ग में तुरंत फल नहीं मिलता। साधना करनी पड़ती है, मन को शुद्ध करना पड़ता है और अहंकार को त्यागना पड़ता है। जैसे-जैसे मन पवित्र होता है, वैसे-वैसे भीतर दिव्य प्रकाश का चाँद उगने लगता है।
प्रवचन के अंत में नवजीत भारद्वाज ने कहा कि जब मनुष्य का हृदय चकोर की तरह परमात्मा के लिए तड़पने लगे, जब उसकी दृष्टि संसार से हटकर हर पल उसका मन प्रभु के स्मरण में डूब जाए, तब समझ लेना चाहिए कि उसकी आध्यात्मिक सुबह होने वाली है।
*धाम के सेवादार नवजीत ने बताया की रविवार 15 मार्च रविवार को मां बगलामुखी धाम में निःशुल्क ” कायरोप्रैक्टिक चिकित्सा ” मेडिकल कैंप का आयोजन किया जा रहा है सभी श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों स निवेदन है कि इस अवसर का लाभ उठाएं।*
इस अवसर पर श्री कंठ जज,निर्मल शर्मा, राकेश प्रभाकर,सरोज बाला,विक्की अग्रवाल, अमरेंद्र कुमार शर्मा,प्रदीप , दिनेश सेठ,सौरभ भाटिया,नरेश,कोमल,वेद प्रकाश, ऋषभ कालिया,रिंकू सैनी, कमलजीत,बलजिंदर सिंह,उदय ,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,बावा जोशी,राकेश शर्मा, अमरेंद्र सिंह,नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत,मनीष शर्मा, डॉ गुप्ता,दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा, वरुण, नितिश,रोमी,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा , रवि भल्ला, जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक,प्रिंस कुमार, दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,नरेश,दिक्षित, अनिल,अजय सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।
हवन यज्ञ उपरांत विशाल लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।