फगवाड़ा ( )
आज आधुनिकता की दौड़ में हमने शादियों को एक आध्यात्मिक मिलन के बजाय एक ‘इवेंट’ बना दिया है। विवाह की नींव जिस वातावरण में रखी जाती है, उसका प्रभाव दांपत्य जीवन के भविष्य पर भी पड़ता है। होटलों और पैलेसों में होने वाली शादियाँ रिश्तों को मजबूती नहीं दे पा रही हैं। अपवित्र वातावरण रिश्तों में कड़वाहट की वजह बन रहा है। विवाह एक धार्मिक संस्कार है। लेकिन जहाँ मांस (मीट), अंडा और शराब का खुलेआम सेवन होता है, वहाँ वह सात्विक ऊर्जा समाप्त हो जाती है। यह विचार खत्री महासभा पंजाब के महासचिव, भाजपा एनजीओ सैल पंजाब के कार्यकारी सदस्य, ह्यूमन राईटस कोंसिल इंडिया (एंटी करप्शन सेल) के प्रदेश अध्यक्ष, विश्व हिंदू संघ के जिला कपूरथला अध्यक्ष तथा खत्री अरोड़ा वैलफेयर बोर्ड पंजाब सरकार के पूर्व सदस्य, पंजाब हिन्दू ग्रुप के प्रदेश सदस्य और जालंधर जोन कोआर्डिनेटर एवं फगवाड़ा के प्रसिद्ध समाज सेवक रमन नेहरा ने प्रेस विज्ञप्ति में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में विवाह को देवताओं के सानिध्य में संपन्न करने की परंपरा रही है। होटलों की ‘पार्टी कल्चर’ में अक्सर वह पारंपरिक गरिमा कहीं खो जाती है जो एक नए जीवन की शुरुआत के लिए आवश्यक है। जब शादी की शुरुआत ही नशे और शोर-शराबे के बीच होती है, तो वहां मर्यादा और अनुशासन की जगह उच्छृंखलता ले लेती है। जहाँ पवित्र मंत्रों का उच्चारण होना चाहिए, वहाँ आज तामसिक भोजन और नशा एक ‘स्टेटस सिंबल’ बन गया है। यही कारण है कि छोटी-छोटी बातों पर अहंकार टकराते हैं और रिश्ते टूटने की नौबत आ जाती है।
नेहरा ने कहा कि होटलों की चकाचौंध में लोग केवल ‘दिखने’ पर ध्यान देते हैं, ‘जुड़ने’ पर नहीं। मंदिर जैसे स्थान पर इंसान विनम्र होता है, जबकि महंगे होटलों में ‘अहंकार’ बढ़ता है, जो आगे चलकर अलगाव का कारण बनता है। जबकि मंदिर मर्यादा और संकल्प का प्रतीक है। मंदिर में विवाह करने का अर्थ केवल कम खर्च नहीं, बल्कि एक ‘मर्यादा’ में बंधना है। मंदिर के वातावरण में तामसिक चीजों का प्रवेश वर्जित होता है, जिससे मन शांत और पवित्र रहता है। होटलों में खाना और सजावट मुख्य हो जाती है, जबकि मंदिर में ध्यान सिर्फ फेरों और आशीर्वाद पर रहता है। हमें अपनी आने वाली पीढ़ी को संस्कारों की अहमियत समझानी होगी।
रमन ने कहा कि यदि शादियाँ फिर से मंदिरों की ओर लौटती हैं, तो यह न केवल फिजूलखर्ची को रोकेगा, बल्कि हमारे समाज को एक अधिक जागरूक और आध्यात्मिक दिशा की ओर ले जाएगा।