भारत के महान संविधान निर्माता, समाज सुधारक और दलितों के मसीहा डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती हर वर्ष 14 अप्रैल को श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है। यह दिन केवल उनके जन्म का उत्सव नहीं, बल्कि उनके द्वारा स्थापित न्याय, समानता और मानव अधिकारों के मूल्यों को पुनः स्मरण करने का अवसर है।

डॉ. अंबेडकर का जीवन संघर्ष, शिक्षा और आत्मसम्मान की मिसाल है। उन्होंने भारतीय संविधान के माध्यम से हर नागरिक को समान अधिकार दिलाने का कार्य किया, लेकिन उनका योगदान केवल संविधान तक सीमित नहीं था। वे भारत के श्रमिक वर्ग के अधिकारों के भी सबसे बड़े संरक्षक थे।

आज के संदर्भ में यह सवाल उठता है कि क्या हम उनके आदर्शों पर चल रहे हैं? पंजाब में वर्तमान सरकार कर्मचारियों और आम जनता से किए गए वादों को पूरा करने में विफल रही है। डॉ. अंबेडकर की तस्वीरें दफ्तरों में लगाकर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि—
• ‘आप ‘ पार्टी का कर्मचारियों को ओल्ड एज पेंशन देने का वादा चार साल बाद भी अधूरा है
• ‘ मान ‘ सरकार ने कर्मचारियों का 16% महंगाई भत्ता (DA) रोका हुआ है
• आप सरकार द्वारा अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने का वादा पूरा नहीं किया गया।

चार बार बाबा साहिब के बुतों को
तोड़ने का पर्यास मान सरकार के समय में हुआ।

ऐसे समय में यह और भी जरूरी हो जाता है कि हम देखें कि बाबा साहेब ने श्रम मंत्री ( बाबा साहिब विएसरॉय कौंसिल में 1942-46 तक एग्जीक्यूटिव मेंबर थे ) होते हुए वास्तव में श्रमिकों और कर्मचारियों के लिए क्या किया था।

डॉ. अंबेडकर का श्रमिकों और महिलाओं के अधिकारों के लिए ऐतिहासिक योगदान:

डॉ. अंबेडकर ने उस समय श्रमिकों के लिए क्रांतिकारी सुधार किए, जब उनके अधिकारों की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी—
• काम के घंटे 14 से घटाकर 8 घंटे करवाए
• महंगाई भत्ता (Dearness Allowance – DA) की व्यवस्था लागू करवाई
• वेतन सहित छुट्टियों का प्रावधान सुनिश्चित किया
• फैक्ट्री कर्मचारियों के लिए अनिवार्य बीमा लागू किया
• श्रमिकों को हड़ताल का कानूनी अधिकार दिलाया
• भविष्य निधि (Provident Fund) की व्यवस्था लागू करवाई
• महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) सुनिश्चित किया
• महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनवाए
• श्रमिक महिलाओं के लिए वेलफेयर फंड की स्थापना करवाई
• खदानों में काम करने वाली महिलाओं के लिए विशेष मातृत्व अवकाश लागू किया
• कामकाजी महिलाओं के बच्चों के लिए क्रेच (Crèche) की व्यवस्था सुनिश्चित की
• कोयला खदानों में महिलाओं के कार्य पर प्रतिबंध लगाकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की
• भारत में रोजगार कार्यालय (Employment Exchanges) की स्थापना करवाई
• कर्मचारियों के लिए अनिवार्य बीमा की व्यवस्था लागू की
• न्यूनतम मजदूरी कानून (Minimum Wages Act) पारित करवाया
• कोयला और अभ्रक (mica) खदानों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि कानून लागू किया

ये सभी कदम उस समय उठाए गए जब श्रमिकों का शोषण आम बात थी। डॉ. अंबेडकर ने न केवल कानून बनाए, बल्कि यह सुनिश्चित किया कि श्रमिकों को सम्मानजनक जीवन और सुरक्षा
दी जाए।
आज जब हम डॉ. अंबेडकर की जयंती मनाते हैं, तो यह समझना जरूरी है कि उन्होंने केवल एक संविधान नहीं दिया, बल्कि एक ऐसा सामाजिक और आर्थिक ढांचा तैयार किया जिसमें हर वर्ग—विशेषकर गरीब, दलित, श्रमिक और महिलाएं—सम्मान के साथ जीवन जी सकें।
महलायों के लिए वो हिन्दूकोड बिल लाए जिस में महल्याओं को पुरषों के बराबर सम्पत्ति का अधिकार , तलाक़ का अधिकार और माता पिता की संपत्ति का लड़की को अधिकार देने की बात थी चाहे लड़की का कोई भी भाई ना हो।
, जब उस समय की नेहरू सरकार ने बिल ना मंज़ूर किया तो डॉ भीमराव अंबेडकर ने क़ानून मंत्री के पद से अस्तीफ़ा दे दिया। यह बलिदान आज की महिलाओं को पता होना चाहिये के संविधान द्वारा जा हिंदू फ़ैमिली लॉ में जो भी प्रावधान हैं सभी बाबा साहिब की सोच का नतीजा है।
बाबा साहिब ने दलित और वंचितों के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। तीन गोल मेज़ कॉन्फ़्रेंस में वो अस्पर्शों के लिए दोहरी वोट का अधिकार लेकर आये। मोहन दास करम चंद गांधी उस समय आज़ादी आंदोलन के बेताज बादशाह थे। अंग्रेज़ों के दोहरी वोट के फ़ैसले पर उन्होंने मरण वरत रख दिया। पूना पैकेट के तहत डॉ अंबेडकर ने वंचितों के लिए आरक्षण की व्यवस्था करवायी जो आज तक चल रही है। डॉ अंबेडकर एक सच्चे देश भगत थे। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने डॉ अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते समय बोला के उन के हाथ में जब कलम थी , फ़ैसला लेने का समय था, अंबेडकर जी के विचारों में कहीं भी कटुता नज़र नहीं आती। यह उनकी महानता है। मोदी जी की सरकार ने उस महामानव को श्रद्धांजलि देने के लिये पंचतीरथ का निर्माण करवाया। महू(जन्म स्थान), दिल्ली (प्रेनिर्वाण), शिक्षा( इंग्लैंड), दीक्षा भूमि(नागपुर) और चैतिया भूमि (मुंबई), २६ नवम्बर को सविधान दिवस मनाना शुरू किया, भीम एप और अनेकों कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। उनके नाम पर भव्य
इमारतें, स्टडी हॉल और केंद्र बनाए। पड़ने के लिए स्कालरशिप और लाइब्रेरी/म्यूजियम बनाए।

उनका प्रसिद्ध संदेश—“शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो”—आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

डॉ. अंबेडकर ने केवल देश का संविधान ही नहीं लिखा, बल्कि ऐसे अनेक ऐतिहासिक कार्य किए जिनके लिए पूरा देश सदैव उनका ऋणी रहेगा।

डॉ. अंबेडकर का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्चा राष्ट्र निर्माण केवल राजनीतिक स्वतंत्रता से नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक न्याय से होता है।

इस पावन अवसर पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम उनके विचारों को अपनाते हुए एक ऐसे भारत का निर्माण करेंगे जहाँ हर व्यक्ति को समान अवसर, सम्मान और अधिकार मिले।

मैं बाबा साहिब को कबीर जी के शब्दों में नमन करना चाहता हूँ,

“जननी जने तो भक्त जन, कै दाता कै सूर।
नहीं तो जननी बांझ रहै, काहे गवांए नूर॥”