दिल्ली; भारत सरकार ने टैक्स प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए ‘आयकर अधिनियम 2025’ लागू कर दिया है। यह नया कानून दशकों पुराने 1961 के अधिनियम की जगह लेगा और 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य कागजी कार्रवाई को कम करना और आम करदाताओं के लिए टैक्स की भाषा को सरल बनाना है।
अब तक करदाता अक्सर ‘फाइनेंशियल ईयर’ और ‘असेसमेंट ईयर’ के बीच उलझे रहते थे। नए कानून में इन दोनों को खत्म करके केवल एक ही शब्द ‘टैक्स ईयर’ रखा गया है। इससे आईटीआर फाइलिंग की प्रक्रिया काफी सरल हो जाएगी।सैलरीड क्लास और व्यक्तिगत करदाताओं के लिए अंतिम तिथि 31 जुलाई ही रहेगी। हालांकि, बिजनेस और प्रोफेशनल टैक्सपेयर् के लिए समय सीमा को बढ़ाकर 31 अगस्त कर दिया गया है, जिससे उन्हें ऑडिट और तैयारी के लिए एक महीना अतिरिक्त मिलेगा।
किराए के मकान में रहने वालों के लिए अच्छी खबर है। अब दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े मेट्रो शहरों के अलावा बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद के निवासियों को भी 50% HRA छूट की श्रेणी में शामिल किया गया है। वहीं, नोएडा और गुरुग्राम जैसे शहरों में रहने वाले लोग अब 40% टैक्स छूट का दावा कर सकेंगे। हालांकि, अब मकान मालिक का पैन कार्ड और रसीद देना अनिवार्य कर दिया गया है।
ट्रेडिंग करने वालों के लिए टैक्स का बोझ बढ़ गया है। फ्यूचर एंड ऑप्शंस (F&O) पर सिक्‍योरिटी ट्रांजैक्‍शन टैक्‍स (STT) को बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है। इसके अलावा, शेयरों के बायबैक से होने वाली कमाई पर अब डिविडेंड के बजाय कैपिटल गेन के रूप में टैक्स लगेगा, जिससे प्रमोटर्स और रिटेल निवेशकों की देनदारी बढ़ सकती है।
सिर्फ आधार कार्ड से पैन कार्ड बनवाना अब संभव नहीं होगा; इसके लिए अतिरिक्त दस्तावेज देने होंगे। साथ ही, साल में ₹10 लाख से अधिक कैश जमा करने, ₹5 लाख से महंगी गाड़ी खरीदने या ₹1 लाख से अधिक का होटल बिल चुकाने पर पैन देना अनिवार्य कर दिया गया है।

टैक्स के फॉर्म के नामों को पूरी तरह बदल दिया गया है, हालांकि उनका काम पहले जैसा ही रहेगा। उदाहरण के लिए, अब आपको फॉर्म 16 की जगह ‘फॉर्म 130’ मिलेगा। इसी तरह 26AS अब ‘फॉर्म 168’ के नाम से जाना जाएगा।

यह नया कानून करदाताओं के लिए जहां कुछ मोर्चों पर बड़ी राहत लेकर आया है, वहीं स्टॉक मार्केट और हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन करने वालों के लिए अनुपालन को अधिक सख्त बना दिया गया है।