
हंसराज महिला महाविद्यालय ,जालंधर के स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग द्वारा प्राचार्या डॉ. एकता खोसला के मार्गदर्शन में चंडीगढ़ स्थित गवर्मेन्ट रिहैबिलिटेशन इंस्टिट्यूट फार इनटेलकचुअल डिसएबिलिटी का एक शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया। इस भ्रमण का उद्देश्य छात्राओं को बौद्धिक दिव्यांगता से ग्रसित व्यक्तियों के लिए पुनर्वास सेवाओं और समावेशी प्रथाओं का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था। इस अवसर पर मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. अश्मीन कौर तथा सुश्री नंदिता शर्मा ने बी.वॉक/एम.वॉक एवं ऑनर्स की छात्राओं के साथ सहभागिता की। भ्रमण के दौरान छात्राओं ने विभिन्न उपचारात्मक (थेरैप्यूटिक) एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अवलोकन किया और मूल्यांकन, हस्तक्षेप तथा सहयोगी प्रणालियों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। उन्हें बैग निर्माण, सिलाई, कंप्यूटर बेसिक्स, हस्तशिल्प, बढ़ईगिरी तथा वाद्य यंत्रों जैसे विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों से भी अवगत कराया गया, जो कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के महत्व को दर्शाते हैं। छात्राओं ने विशेष शिक्षकों के साथ संवाद कर व्यक्तिगत शिक्षण रणनीतियों और इस क्षेत्र में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को गहराई से समझा। इस अनुभव ने क्षमता-आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया, जिसमें व्यक्तियों की क्षमताओं और संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। साथ ही, इसने छात्राओं में संवेदनशीलता, व्यावसायिक समझ और समावेशी दृष्टिकोण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा दिया। इस भ्रमण में चंडीगढ़ के सुखना झील का सुखद भ्रमण भी शामिल रहा। प्राचार्या डॉ. एकता खोसला ने अपने संदेश में कहा कि ऐसे शैक्षणिक भ्रमण छात्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि कक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान को व्यवहारिक अनुभव से जोड़ना आवश्यक है, ताकि छात्र समाज की वास्तविक आवश्यकताओं को समझ सकें। उन्होंने समावेशी शिक्षा और संवेदनशील दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए विद्यार्थियों को समाज के प्रति उत्तरदायी और जागरूक नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया। समग्र रूप से, यह शैक्षणिक भ्रमण अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं समृद्ध अनुभव सिद्ध हुआ, जिसने सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक अनुप्रयोग के बीच की दूरी को कम किया।