नूरमहल:
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, नूरमहल आश्रम में मासिक सत्संग कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में किया गया। इस विशेष कार्यक्रम को उन सेवादारों को समर्पित किया गया, जो वर्षभर विभिन्न विभागों में तन, मन एवं निष्ठा के साथ निरंतर सेवा कार्यों में योगदान देते हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य सेवादारों के उत्साह को बढ़ाना तथा उनके सेवा भाव का सम्मान करना रहा।

समागम के दौरान आश्रम परिसर भक्तिमय भजनों एवं आध्यात्मिक वातावरण से ओत-प्रोत रहा। संगत ने भजनों का रसास्वादन करते हुए गुरु चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की तथा सत्संग का आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।

इस अवसर पर स्वामी विश्वानंद जी एवं स्वामी चिन्मयानंद जी ने संगत को संबोधित करते हुए सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि निःस्वार्थ सेवा केवल बाहरी कार्य नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति का माध्यम है। जब व्यक्ति बिना किसी अपेक्षा के मानवता एवं गुरु कार्य में अपना योगदान देता है, तभी उसके जीवन में सच्ची संतुष्टि एवं आध्यात्मिक प्रगति का संचार होता है।

वक्ताओं ने कहा कि संस्थान के विभिन्न सेवा विभागों में कार्यरत सेवादार समाज में प्रेम, सहयोग एवं समर्पण की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनका सेवा भाव अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।

समागम के दौरान उपस्थित संगत ने आध्यात्मिक विचारों एवं भक्ति रस से परिपूर्ण वातावरण का आनंद लिया। कार्यक्रम ने सभी के भीतर सेवा, समर्पण एवं गुरु भक्ति की भावना को और अधिक दृढ़ किया।