जालंधर: आज यहाँ स्थानीय होटल में नीमा जालंधर की मासिक संगोष्ठी का आयोजन डॉक्टर एस पी डालिया की अध्यक्षता में आयोजित हुआ इस समारोह का आयोजन NHS हॉस्पिटल के सहयोग से किया गया जिसमें संस्था के प्रमुख स्पेशलिस्ट मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित हुए प्रथम सर्व भगवान धनवंतरी पूजन के बाद सेक्रेटरी डॉक्टर राजीव धवन ने नीमा सदस्यों से खचाखच भरे हुए हॉल में आए हुए नीमा सदस्यों का स्वागत किया तदापुरांत सर्वप्रथम एक्यूट इस्केमिक स्ट्रोक – निदान एवं त्वरित उपचार विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ. पार्था रंजन साहा (DM न्यूरोलॉजी) ने अधरंग के विभिन्न लक्षणों और इसके अलग-अलग रूपों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह, धूम्रपान, मोटापा तथा अनियमित जीवनशैली अधरंग के प्रमुख जोखिम कारक हैं। डॉ. साहा ने समझाया कि आधुनिक न्यूरो-इमेजिंग तकनीकों की सहायता से अधरंग की सही और जल्दी पहचान संभव हो गई है, जिससे एंडोवास्कुलर थेरेपी जैसी उन्नत उपचार विधियों का समय पर उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि समय पर निदान और उचित उपचार से भविष्य में होने वाले मस्तिष्क संबंधी रक्तवाहिका रोगों के खतरे को कम किया जा सकता है
इसके बाद अचानक होने वाला अधरंग (Acute Stroke) के प्रबंधन विषय पर अपने विचार रखते हुए डॉक्टर संदीप गोयल, डायरेक्टर एवं सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट, ने बताया किअधरंग एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें हर सेकंड बहुत महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि अधरंग के लक्षणों की समय पर पहचान, जल्दी जांच और तुरंत उपचार से मरीज के बेहतर होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। डॉ. गोयल ने वर्तमान उपचार पद्धतियों, विभिन्न विशेषज्ञों की संयुक्त भूमिका (मल्टीडिसिप्लिनरी केयर) तथा अधरंग से होने वाली विकलांगता और मृत्यु दर को कम करने के लिए जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।
अंत में इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. हुड्डा ने एक्यूट स्ट्रोक में एंडोवास्कुलर उपचार एवं कैरोटिड आर्टरी स्टेंटिंग विषय पर एक ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि अधरंग के मामलों में समय पर तुरंत इलाज करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इससे दिमाग में रक्त प्रवाह को दोबारा बहाल किया जा सकता है और स्थायी न्यूरोलॉजिकल क्षति से बचाव किया जा सकता है। डॉ. हुड्डा ने बताया कि एंडोवास्कुलर तकनीकों जैसी आधुनिक उपचार विधियाँ अधरंग के इलाज में महत्वपूर्ण बदलाव ला रही हैं, जिससे मरीजों के बेहतर स्वास्थ्य परिणाम प्राप्त हो रहे हैं और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।
इसके बाद तीनों विशेषज्ञों ने नीमा सदस्यों के प्रश्नों का उत्तर अच्छी तरह से दिया तदोपरांत आए हुए मुख्य वक्ताओं को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया अंत में डॉक्टर एस पी डालिया ने नये तथा आए हुए नीमा के सभी सदस्यों धन्यवाद किया तथा बताया कि 21 June को होने वाले योग दिवस के लिए पंजाब नीमा के महासचिव डॉ अनिल नागरथ  ऑल इंडिया कॉर्डिनेटर और डॉक्टर विपुल कक्कड़ को पंजाब का कॉर्डिनेटर और डॉ शशि भूषण को जालंधर का कॉर्डिनेटर नियुक्त किया गया है साथ ही डॉ विपुल कक्कड़ को इस गोष्ठी को सुचारू रूप से आयोजित करने के लिए विशेष धन्यवाद किया मंच का संचालन डॉक्टर मोहम्मद उरफान ने बड़ी बख़ूबी से किया

इस सभा में
राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ विशाल भनोट
शहर के हैल्थ आफिसर डॉ श्री कृष्ण
डॉ के एस राना
डॉ अविनाश
डॉ वरूण अग्रवाल
डॉ सुरिंदर कल्याण
डॉ बब्बर

डॉ गांधी
डॉ राजेश शर्मा
डॉ भजन खेपड़ा
तथा
डॉ मीनल
डॉ सुनीता नागरथ
डॉ रचना हांडा
मनी सोडी
वंदना यश
डॉ रीना मल्होत्रा