*मोहाली, जुलाई, 2026* : इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) के कार्यकारी बोर्ड ने घोषणा की है कि प्रोफेसर मदन पिल्लुतला अगले पाँच वर्षों के लिए लगातार दूसरे कार्यकाल में डीन के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे। यह निर्णय संस्थान के विकास और वैश्विक प्रभाव के अगले चरण के लिए उनके नेतृत्व और दूरदर्शी सोच पर बोर्ड के भरोसे को दर्शाता है। इसी वर्ष आईएसबी अपनी स्थापना की 25वीं वर्षगांठ भी मना रहा है।

अपने पहले कार्यकाल के दौरान प्रोफेसर मदन पिल्लुतला ने कई महत्वपूर्ण रणनीतिक पहलों का नेतृत्व किया, जिनसे आईएसबी के शैक्षणिक कार्यक्रमों, रिसर्च इम्पैक्ट, एंटरप्रेन्योरशिप इकोसिस्टम और संस्थान की ब्रांड पहचान को नई मजबूती मिली। इनमें पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन मैनेजमेंट फॉर यंग लीडर्स (पीजीपी वाईएल) की शुरुआत, महत्वाकांक्षी उद्यमियों के लिए अपनी तरह का पहला आवासीय कार्यक्रम आई-वेंचर इमर्सिव (आईवीआई) तथा आईएसबी डिस्कवर का शुभारंभ शामिल है। आईएसबी डिस्कवर भारत का पहला ऐसा डिजिटल प्लेटफार्म है, जो फैकल्टी रिसर्च को बिज़नेस, पॉलिसी और सोसाइटी के लिए व्यावहारिक एवं उपयोगी जानकारियों में परिवर्तित करता है। उन्होंने आईएसबी के प्रमुख पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन मैनेजमेंट (पीजीपी) के पाठ्यक्रम को भी रिडिजाइन किया, ताकि यह बदलती कारोबारी परिस्थितियों और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप बना रहे।

प्रोफेसर मदन पिल्लुतला के नेतृत्व में आईएसबी ने वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिष्ठा को और मजबूत किया है। संस्थान के प्रमुख पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन मैनेजमेंट (पीजीपी) ने फाइनेंशियल टाइम्स ग्लोबल एमबीए रैंकिंग 2026 में विश्व स्तर पर 12वां स्थान हासिल किया। वहीं, वर्ष 2025 में आईएसबी को लिंक्डइन टॉप एमबीए प्रोग्राम्स 2025 में पांचवां स्थान प्राप्त हुआ। यह रैंकिंग दुनिया भर के बिजनेस स्कूलों के एमबीए एलुमनाई के करियर आउटकम्स के आधार पर तैयार की जाती है।

प्रोफेसर मदन पिल्लुतला के पहले कार्यकाल के दौरान आईएसबी की संस्थागत नींव को मजबूत करने की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई। संस्थान ने स्कॉलरशिप सपोर्ट का विस्तार करते हुए, वर्ल्ड-क्लास मैनेजमेंट एजुकेशन को अधिक सुलभ बनाया। साथ ही, छात्रों, एलुमनाई, ग्लोबल पार्टनर्स और इंडस्ट्री के साथ अपने जुड़ाव को भी और सशक्त किया। इसी अवधि में आईएसबी ने अपने परोपकारी सहयोग के आधार का भी विस्तार किया। एलुमनाई, डोनर्स और संस्थागत भागीदारों से बढ़ते सहयोग ने रिसर्च, फैकल्टी, स्कॉलरशिप्स और इंस्टीट्यूशनल डेवलपमेंट जैसी दीर्घकालिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन सभी पहलों ने मिलकर आईएसबी को एशिया के अग्रणी बिजनेस स्कूलों में अपनी स्थिति और अधिक मजबूत करने के साथ-साथ भविष्य की विकास यात्रा के लिए एक सुदृढ़ आधार भी प्रदान किया।

कार्यकाल विस्तार की घोषणा करते हुए इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के एग्जीक्यूटिव बोर्ड के चेयरमैन, हरीश मनवानी ने कहा, “प्रोफेसर मदन पिल्लुतला का पहला कार्यकाल संस्थान के लिए कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों से परिपूर्ण रहा है। उनके नेतृत्व में आईएसबी ने अकादमिक और रिसर्च के क्षेत्र में अपनी प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ किया है, ग्लोबल पार्टनरशिप्स को मजबूत बनाया है तथा एशिया के लीडिंग बिजनेस स्कूलों में अपनी पहचान को और सशक्त किया है। इस दौरान संस्थान ने अपने प्रोग्राम पोर्टफोलियो के दायरे का विस्तार किया, स्टूडेंट्स और एलुमनाई के अनुभव को बेहतर बनाया तथा राष्ट्रीय एवं वैश्विक महत्व के विषयों पर थॉट लीडरशिप प्लेटफार्म के रूप में आईएसबी की भूमिका को और मजबूत किया। इसी अवधि में आईएसबी के परोपकारी सहयोग के आधार में भी उल्लेखनीय मजबूती आई है। फंडरेज़िंग में निरंतर वृद्धि हुई है और डोनर्स तथा पार्टनर्स की कम्युनिटी भी लगातार बढ़ी है, जो संस्थान के लॉन्ग-टर्म विज़न के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जता रहे हैं। हमें विश्वास है कि प्रोफेसर पिल्लुतला के नेतृत्व में आने वाले वर्षों में भी आईएसबी नई ऊंचाइयों को छूते हुए और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाएगा।”

इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के डीन प्रोफेसर मदन पिल्लुतला ने कहा, “आईएसबी की सेवा एक और कार्यकाल तक जारी रखना मेरे लिए अत्यंत सम्मान की बात है। मैं बोर्ड का आभारी हूँ कि उसने मुझे इस उत्कृष्ट संस्थान का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी एक बार फिर सौंपी है। मैं हमारे फैकल्टी, सहकर्मियों, छात्रों, एलुमनाई और सभी पार्टनर्स का उनके विश्वास, सहयोग और संस्थान के प्रति समर्पण के लिए हार्दिक धन्यवाद देता हूँ।हम सभी मिलकर जिम्मेदार नेतृत्वकर्ताओं का निर्माण, समाज और उद्योग के लिए उपयोगी ज्ञान का सृजन तथा व्यवसाय एवं समाज की सेवा के माध्यम से भारत के भविष्य के निर्माण में आईएसबी के योगदान को और अधिक मजबूत बनाएंगे।”

प्रोफेसर मदन पिल्लुतला का आईएसबी से जुड़ाव संस्थान की स्थापना के समय से ही रहा है। उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन मैनेजमेंट (पीजीपी) के पहले बैच को पढ़ाया था और एरिया लीडर फॉर ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर के रूप में भी कार्य किया है। आईएसबी के डीन बनने से पहले वे लंदन बिजनेस स्कूल (एलबीएस) में ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर के प्रोफेसर के रूप में कई प्रतिष्ठित शैक्षणिक और प्रशासनिक पदों पर कार्यरत रहे। वैश्विक स्तर का उनका व्यापक शैक्षणिक अनुभव और उभरते बाजारों की गहरी समझ आज भी आईएसबी को अगली पीढ़ी के व्यावसायिक नेतृत्वकर्ताओं को तैयार करने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान कर रही है।