जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान भोला शर्मा से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध मां बगलामुखी धाम में आयोजित दिव्य हवन के दौरान यज्ञ की पावन अग्नि प्रज्वलित रही और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो उठा। इस पावन अवसर पर धाम के पीठ उपासक नवजीत भारद्वाज जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को अपने ओजस्वी एवं प्रेरणादायी प्रवचनों से आध्यात्मिक ज्ञान का अमृतपान करवाया। अपने प्रवचन की शुरुआत उन्होंने प्रसिद्ध सूफी पंक्तियों से की
*‘‘चढ़दे सूरज ढलदे वेखे, बुझदे दीवे बलदे वेखे।*
*हीरे दा कोई मुल्ल ना जाणे, खोटे सिक्के चलदे वेखे।*
*कई पैरां तो नंगे फिरदे, सिर ते लभदे छावां,*
*मैनूं दाता सब कुछ दित्ता, क्यों ना शुकर मनावां!’’*
इन पंक्तियों की गहराई समझाते हुए नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि यह केवल कविता नहीं, बल्कि जीवन का शाश्वत सत्य है। समय से बड़ा कोई राजा नहीं और परिस्थितियों से बड़ा कोई शिक्षक नहीं होता। जो आज शिखर पर है, वह कल नीचे भी आ सकता है और जो आज संघर्ष कर रहा है, उसकी किस्मत भी कभी भी बदल सकती है। इसलिए सफलता में अहंकार और विपरीत परिस्थितियों में निराशा—दोनों से बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संसार का सबसे बड़ा भ्रम यह है कि मनुष्य अपनी शक्ति, धन और प्रतिष्ठा को स्थायी समझ बैठता है, जबकि समय हर स्थिति को बदल देता है। इतिहास गवाह है कि उगते सूरज को भी एक दिन ढलना पड़ता है। महलों में रहने वाले भी मिट्टी में मिल जाते हैं और झोपड़ी में रहने वाले भी अपनी मेहनत, सत्कर्म और ईश्वर की कृपा से ऊँचाइयों तक पहुँच जाते हैं।
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज के दौर की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि असली हीरे की पहचान कम लोग करते हैं, लेकिन नकली चमक के पीछे पूरी दुनिया दौड़ पड़ती है। सच्चाई, ईमानदारी और चरित्र का मूल्य घटता जा रहा है, जबकि दिखावा, छल और स्वार्थ कई बार सम्मान पा लेते हैं। पर याद रखिए, नकली सिक्के कुछ समय तक बाजार में चल सकते हैं, लेकिन इतिहास में जगह केवल असली हीरे ही बनाते हैं।
सूफी वाणी का मर्म समझाते हुए उन्होंने कहा कि हम अक्सर अपनी अधूरी इच्छाओं का हिसाब रखते हैं, लेकिन ईश्वर द्वारा दिए गए अनगिनत उपहारों को भूल जाते हैं। जिन पैरों में जूते नहीं हैं, वे भी सिर पर छत की तलाश में भटक रहे हैं। जिनके पास छत है, वे और बड़ी हवेली चाहते हैं। जिनके पास भोजन है, वे स्वाद की शिकायत करते हैं। जिनके पास परिवार है, वे समय नहीं देते। यही भूल इंसान को दुखी बना देती है।
प्रवचन के समापन पर नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि जिस दिन इंसान तुलना छोड़कर कृतज्ञता सीख लेगा, उसी दिन उसके जीवन का अंधेरा समाप्त हो जाएगा। सुख वस्तुओं से नहीं, दृष्टिकोण से आता है। जिसके हृदय में भगवान का शुक्राना बस जाता है, उसके जीवन में शिकायतों की जगह शांति और संतोष आ जाते हैं।

इस अवसर पर श्वेता भारद्वाज, सरोज बाला, समीर कपूर, विक्की अग्रवाल, अमरेंद्र कुमार शर्मा, अमृतपाल, प्रदीप , दिनेश सेठ,सौरभ भाटिया,विवेक अग्रवाल, जानू थापर,नरेश,कोमल, मुनीष मैहरा, जगदीश, ऋषभ कालिया,रिंकू सैनी, कमलजीत,बलजिंदर सिंह,बावा खन्ना, धर्मपाल, अमरजीत,उदय ,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,राकेश शर्मा, अमरेंद्र सिंह, विनोद खन्ना, नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत ,जोगिंदर,मनीष शर्मा, डॉ गुप्ता,अमनदीप, परमजीत, दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, गुलशन,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा, ऐडवोकेट शर्मा,वरुण, नितिश,रोमी,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा , रवि भल्ला, भोला शर्मा, जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक,दसोंधा सिंह, प्रिंस कुमार, पप्पू , दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, नरेश,दिक्षित, अनिल, कमल, अजय,बलदेव सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।
हवन यज्ञ उपरांत विशाल लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।