
एचएमवी में वेद प्रचार सप्ताह का समापन समारोह श्रद्दापूर्वक मनाया गया

हंसराज महिला महाविद्यालय, जालंधर में प्राचार्या डॉ. (श्रीमती) एकता खोसला के मार्गदर्शन में वेदों की शिक्षाओं, भारतीय संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से वेद प्रचार सप्ताह का समापन समारोह श्रद्धापूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ हवन-यज्ञ के साथ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच हवन में आहुतियाँ डालकर सभी के सुख, शांति एवं कल्याण की कामना की गई। इस अवसर पर प्रधान आर्य प्रादेशिक प्रतिनिधि उपसभा, पंजाब श्री जे.पी. शूर मुय अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विशेष अतिथि के रूप में श्री एन के सूद उप प्रधान डीएवीसीएमसी एवं चेयरमैन लोकल एडवाइजरी कमेटी, सेक्रेटरी डीएवीसीएमसी श्री अजय गोस्वामी एवं उप-संरक्षक आर्य प्रादेशिक प्रतिनिधि उपसभा, पंजाब श्री कुँदनलाल अग्रवाल उपस्थित रहे। महाविद्यालय की प्राचार्या एवं मंत्री आर्य प्रादेशिक प्रतिनिधि उपसभा, पंजाब डॉ. (श्रीमती) एकता खोसला ने सभी अतिथियों को प्लांटर एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर उनका हार्दिक स्वागत किया । वेद प्रचार के सात दिवसीय कार्यक्रम के अंतर्गत छात्राओं के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें निबंध लेखन, कविता उच्चारण, भाषण, पोस्टर मेकिंग प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएँ , मंत्र उच्चारण, एवं भजन गायन प्रमुख रहीं। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से छात्राओं को वेदों, भारतीय संस्कृति तथा आर्य समाज के प्रमुख स्वामी दयानंद सरस्वती के विचारों, सिद्दांतों एवं प्रमुख महापुरुषों के जीवन से परिचित होना का अवसर िमला। इस अवसर पर प्राचार्या डॉ. (श्रीमती) एकता खोसला ने कहा कि वेद भारतीय ज्ञान और जीवन-दर्शन की अमूल्य धरोहर हैं। वेदों की शिक्षाएँ मनुष्य को सत्य, ज्ञान, अनुशासन, कर्तव्य एवं मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में भी वेदों के विचार पूर्णत: प्रासंगिक हैं और युवा पीढ़ी को अपनी समृद्ध भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़कर उसके सकारात्मक संदेश को जीवन में अपनाना चाहिए। उन्होंने छात्राओं को आर्य समाज के महान व्यक्तियों से प्रेरणा लेते हुए समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर मुय अतिथि श्री जे. पी. शूर ने स्वामी दयानंद सरस्वती की महानता तथा समाज की उन्नति में उनके अतुलनीय योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद ने नारी शिक्षा को विशेष महत्व दिया और महिलाओं को शिक्षित एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने कहा कि नारी अबला नहीं, शक्ति है; वह बोझ नहीं, बल्कि समाज की प्रगति की आधारशिला है। प्रत्येक घर में नारी का समान और उसे शिक्षा का अधिकार मिलना आवश्यक है, तभी समाज वास्तविक उन्नति की ओर अग्रसर हो सकता है। श्री कुंदनलाल ने स्वामी दयानंद सरस्वती तथा उनके गुरु स्वामी विरजानंद के जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आर्य समाज की स्थापना के माध्यम से स्वामी दयानंद ने समाज में जागृति का संदेश दिया तथा लोगों को वेदों का अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने छात्राओं को जीवन में निरंतर आगे बढ़ने और सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। श्री अजय गोस्वामी ने आर्य समाज की स्थापना तथा देश के विकास में उसके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आर्य समाज ने सामाजिक जागृति के साथ-साथ देश की स्वतंत्रता के आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने छात्राओं को वेदों तथा सत्यार्थ प्रकाश को पढ़ने की प्रेरणा दी । कार्यक्रम में छात्राओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेता छात्राओं को प्रशंसा प्रमाण-पत्र प्रदान कर समानित किया गया। संगीत विभाग के अध्यक्ष डॉ. प्रेम सागर एवं उनकी टीम द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया गया । कुमारी जान्हवी ने वेदों के महत्व पर भाषण तथा कुमारी दामिनी ने कविता प्रस्तुत की । समस्त कार्यक्रम डॉ. ज्योति गोगिया , प्रभारी वैदिक अध्ययन समिति और अध्यक्ष हिंदी विभाग तथा डॉ. मीनू तलवाड़, अध्यक्ष संस्कृत विभाग की देख-रेख में संपन्न हुआ । मंच संचालन डॉ. ज्योति गोगिया द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. पवन कुमारी, डॉ . दीप्ति धीर के अतिरिक्त टीचिंग और नॉन टचिंग के सदस्य उपस्थित रहे । कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।



