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हर सांस में प्रभु का नाम बसाओ-नवजीत भारद्वाज

जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में श्री शनिदेव महाराज जी के निमित सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान जानू थापर,रोहित गौतम से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।

सिद्ध माँ बगलामुखी धाम में आयोजित दिव्य हवन यज्ञ के दौरान पूरा धाम आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति की अलौकिक आभा से सराबोर हो उठा। यज्ञ कुंड में प्रज्वलित पावन अग्नि, वैदिक मंत्रों की गूंज और माँ बगलामुखी के जयकारों के बीच उपस्थित श्रद्धालु गहन श्रद्धा और भक्ति में लीन दिखाई दिए। वातावरण इतना दिव्य था मानो प्रत्येक कण में माँ बगलामुखी की कृपा का स्पंदन अनुभव हो रहा हो। इस अवसर पर धाम के पीठ उपासक नवजीत भारद्वाज ने संत मूलकदाजस जी के पावन वचनों
जागो रे अब जागो भैया, सिर पर जम की धार।
ना जानूँ कौने घरी, केहि ले जैहै मार॥
उल्लेख करते हुए कहा कि इन दो पंक्तियों में पूरे जीवन की सच्चाई समेट दी है। यह मनुष्य जीवन बहुत अनमोल है, लेकिन इसका समय निश्चित नहीं है। इसलिए जब तक सांसें चल रही हैं, तब तक प्रभु का नाम, अच्छे कर्म और सच्चे जीवन की ओर जाग जाना चाहिए। हम दुनिया के कामों में इतने उलझ जाते हैं कि हमें लगता है कि अभी बहुत समय पड़ा है। कल से भजन करेंगे, कल से सेवा करेंगे, कल से अपने व्यवहार को बदलेंगे। नवजीत भारद्वाज जी प्रभु भक्तों को समझाते हुए कहते है कि कल हमारे हाथ में नहीं है। हमारे हाथ में केवल आज है।
नवजीत भारद्वाज जी ने इन पंक्तियों को स्पष्टता पूर्ण समझाते हुए एक धार्मिक उदाहरण सुनाते हुए कहा कि एक संत नदी के किनारे बैठे थे। एक व्यक्ति उनके पास आया और बोला, महाराज, मैं भगवान का भजन कब शुरू करूँ? अभी तो मेरी उम्र पड़ी है। संत ने नदी की ओर इशारा करके कहा, उस नाव में बैठकर नदी पार कर लो, फिर बताना कि किनारे पर पहुँचने के बाद नाव की जरूरत है या नहीं। वह व्यक्ति समझ गया कि जिस साधन की जरूरत रास्ते में है, उसे मंजिल आने के बाद नहीं अपनाया जा सकता।
नवजीत भारद्वाज जी ने कहा, इसी तरह प्रभु का नाम जीवन रहते जपना है। जब समय हाथ से निकल जाए, तब पछताने से क्या लाभ? उन्होंने प्रभु भक्तों से कहा कि सांस-सांस में नाम बसाओ, हरि को अपने मन में ध्याओ। हम सुबह आँखें खोलते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि हम सच में जागे हों। आँखों का खुलना जागना नहीं है, प्रभु की ओर मन का मुड़ जाना असली जागना है।
नवजीत भारद्वाज जी ने प्रवचन के अंत में कहा कि संगत जी, हमें नहीं मालूम कि अगली सांस हमारी होगी या नहीं। इसलिए प्रभु का नाम कल पर मत छोड़ो। किसी से प्रेम करना है आज कर लो। किसी को क्षमा करना है आज कर दो। किसी की सेवा करनी है आज कर दो और प्रभु को याद करना है अभी कर लो। क्योंकि समय बड़ा बलवान है, जो निकल गया वह लौटकर नहीं आता। इसलिए जब तक शरीर में सांस है, तब तक नाम जप लो। जब तक हाथ-पैर चल रहे हैं, तब तक सेवा कर लो। जब तक मन में चेतना है, तब तक प्रभु को पहचान लो।
इस अवसर पर श्वेता भारद्वाज,योगिता गौतम, राकेश प्रभाकर,पूनम प्रभाकर ,सरोज बाला, समीर कपूर,अमरेंद्र कुमार शर्मा,प्रदीप , दिनेश सेठ,सौरभ भाटिया,नरेश,कोमल, ऋषभ कालिया,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया, सुधीर, सुमीत ,जोगिंदर सिंह, मनीष शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा,वरुण, नितिश,रोमी, भोला शर्मा,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल,वंश, रवि भल्ला, जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक,दसोंधा सिंह, प्रिंस कुमार, पप्पू ठाकुर, दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।

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