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डी.ए.वी. कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार ने नई दिल्ली में जगजीत सिंह को संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की

जालंधर: डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर के प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में सुर सरिता, नई दिल्ली द्वारा सुप्रसिद्ध ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह की स्मृति में आयोजित भव्य संगीत संध्या में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र जगजीत सिंह अपनी कालजयी रचनाओं और भारतीय संगीत जगत में अतुलनीय योगदान के कारण आज भी संगीतप्रेमियों के हृदय में जीवित हैं।
इस संगीतमय संध्या का आयोजन डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर के एक अन्य प्रतिष्ठित पूर्व छात्र तथा जगजीत सिंह के सहपाठी, छात्रावास में सहवासी और दीर्घकालीन मित्र श्री वरिंदर चोपड़ा ने किया। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण जगजीत सिंह के छोटे भाई श्री करतार सिंह की मनमोहक संगीत प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अन्य गायकों ने भी जगजीत सिंह की अनेक लोकप्रिय रचनाएँ प्रस्तुत कर उनके संगीत की चिरस्थायी मधुरता को सजीव कर दिया।
इस अवसर पर आयोजकों ने जगजीत सिंह की संगीत-विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन में डी.ए.वी. कॉलेज के निरंतर सहयोग और योगदान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रोफेसर शरद मनोचा, उपप्राचार्य डॉ. कुँवर राजीव तथा श्रीमती सोनिका दानिया को सम्मानित किया। आयोजकों ने उस आत्मीय आतिथ्य का भी स्मरण किया, जो कॉलेज ने ‘अपने-अपने जगजीत’ नामक धारावाहिक की निर्माण-टीम को प्रदान किया था। यह दल जगजीत सिंह के अपने मातृ-संस्थान से संबंधों को उजागर करने वाले एक विशेष प्रकरण की शूटिंग के लिए कॉलेज पहुँचा था।
इस अवसर पर उपप्राचार्य श्रीमती सोनिका दानिया तथा प्रोफेसर शरद मनोचा ने निर्माण-टीम को महाविद्यालय का भ्रमण करवाया। इस भ्रमण में छात्रावास, छात्रजीवन के दौरान जगजीत सिंह का कक्ष, भोजनालय तथा उनके महाविद्यालयीन जीवन से जुड़े अन्य महत्त्वपूर्ण स्थान सम्मिलित थे। प्रसिद्ध प्रस्तोता तपस्या शादान द्वारा प्रस्तुत इस धारावाहिक को ग़ज़ल सम्राट के जीवन और विरासत के प्रभावशाली चित्रण के लिए यूट्यूब पर व्यापक सराहना प्राप्त हो रही है।
डॉ. अनूप कुमार ने अपने सहयोगियों के साथ श्री वरिंदर चोपड़ा तथा श्री करतार सिंह को डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर के सौ वर्षों का इतिहास शीर्षक स्मारक ग्रंथ भेंट किया। जगजीत सिंह के साथ अपने जुड़ाव और उनके संस्मरणों को साझा करते हुए डॉ. अनूप कुमार ने बताया कि जगजीत सिंह का अपने मातृ-संस्थान के प्रति अगाध प्रेम और गहरा भावनात्मक लगाव रहा। उन्होंने कहा कि भारतीय संगीत जगत में जगजीत सिंह का योगदान पीढ़ियों तक संगीतप्रेमियों को प्रेरित करता रहेगा। डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर के साथ उनका आत्मीय संबंध महाविद्यालय के लिए अत्यंत गौरव का विषय है।
डॉ. अनूप कुमार ने प्रस्ताव रखा कि निकट भविष्य में डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर में भी ग़ज़ल सम्राट जगजीत सिंह की स्मृति में इसी प्रकार का संगीतमय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिससे उनकी असाधारण संगीत-विरासत तथा महाविद्यालय के साथ उनके स्थायी संबंधों का उत्सव मनाया जा सके। उन्होंने महाविद्यालय के गौरव-कक्ष में जगजीत सिंह के नाम से एक विशेष स्मृति-दीर्घा स्थापित करने की घोषणा भी की। इसमें उनके विद्यार्थी जीवन की दुर्लभ तस्वीरें तथा उनसे जुड़ी स्मृतियाँ प्रदर्शित की जाएँगी, ताकि विद्यार्थी और आगंतुक भारत के इस महान संगीत साधक के प्रारंभिक जीवन से परिचित हो सकें।
यह संगीतमय संध्या जगजीत सिंह की अमर संगीत-विरासत को समर्पित एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि सिद्ध हुई। इस आयोजन ने डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर की अपने गौरवशाली पूर्व विद्यार्थियों का सम्मान करने तथा उनकी उपलब्धियों और योगदान को जनस्मृति में अक्षुण्ण बनाए रखने की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट किया।

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