
एच.एम.वी. में श्वरूक्चरु-श्वक्चढ्ढ, यूके के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला श्रृंखला संपन्न

हंस राज महिला महाविद्यालय, जालंधर के पीजी बायोइन्फॉर्मेटिक्स एवं बायोटेक्नोलॉजी विभाग द्वारा यूरोपियन मॉलिक्यूलर बायोलॉजी लेबोरेटरी-यूरोपियन बायोइन्फॉर्मेटिक्स इंस्टीट्यूट, हिंक्सटन, यूके के सहयोग से 8 से 9 अक्टूबर, 2026 को आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला श्रृंखला सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस कार्यशाला में श्वरूक्चरु-श्वक्चढ्ढ, हिंक्सटन की एनसीबल आउटरीच अधिकारी एवं विशेषज्ञ रिसोर्स पर्सन लुईस पाओला मिराबुएनो का आयोजन टीम द्वारा गर्मजोशी एवं संगीतमय प्रस्तुति के साथ स्वागत किया गया। उद्घाटन सत्र में प्राचार्या डॉ. (श्रीमती) एकता खोसला ने रिसोर्स पर्सन, प्रतिभागियों एवं आयोजन टीम का औपचारिक स्वागत किया। उन्होंने पीजी बायोइन्फॉर्मेटिक्स विभाग के अध्यक्ष डॉ. हरप्रीत सिंह के प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने पंजाब में इस अनूठी अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला के आयोजन की योजना बनाई और उसका सफल नेतृत्व किया। उन्होंने विशेष रूप से महाविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह के अंतर्गत इस आयोजन के महत्व को रेखांकित किया। डॉ. हरप्रीत सिंह ने कार्यशाला श्रृंखला के उद्देश्य तथा बायोइन्फॉर्मेटिक्स जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के कौशल विकास के लिए विभाग द्वारा की जा रही विभिन्न पहलों की जानकारी दी। डीन रिसर्च डॉ. रमनीता सैनी शारदा ने संस्थान की उपलब्धियों और बायोइन्फॉर्मेटिक्स एवं बायोटेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण महिला शिक्षा के प्रति महाविद्यालय की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के प्रथम दिन इंसेबल डेटा प्लेटफॉर्म पर विशेष ध्यान दिया गया। इसमें प्रतिभागियों को जैविक डेटा तथा इंसेबल पर उपलब्ध विभिन्न संसाधनों के माध्यम से बायोइन्फॉर्मेटिक्स की महत्वपूर्ण अवधारणाओं से परिचित करवाया गया। सुव्यवस्थित प्रशिक्षण मॉड्यूल के माध्यम से प्रतिभागियों को व्यापक व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। दूसरे दिन श्वठ्ठह्यद्गद्वड्ढद्य ञ्जह्म्ड्डद्बठ्ठ-ह्लद्धद्ग-ञ्जह्म्ड्डद्बठ्ठद्गह्म् कार्यशाला आयोजित की गई, जिसे विशेष रूप से प्राध्यापकों एवं शोधकर्ताओं के लिए तैयार किया गया था। इस सत्र में संरचित अयासों एवं स्थापित प्रशिक्षण पद्धतियों के माध्यम से शिक्षण और प्रशिक्षण कौशल को विकसित करने पर जोर दिया गया। इस दो दिवसीय कार्यशाला श्रृंखला में 140 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। लुईस पाओला मिराबुएनो ने अपनी ऊर्जावान, रोचक एवं सहभागितापूर्ण प्रशिक्षण शैली से सत्रों को अत्यंत प्रभावशाली बनाया। समस्या-समाधान आधारित गतिविधियों, प्रश्नोत्तर सत्रों तथा विजेताओं को पुरस्कार प्रदान करने की व्यवस्था ने प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित किया। महाविद्यालय ने श्वरूक्चरु-श्वक्चढ्ढ की संपूर्ण प्रशिक्षण टीम के सहयोग एवं समर्थन के प्रति आभार व्यक्त किया। इस पहल की प्रारंभिक योजना कोलकाता में आयोजित ढ्ढठ्ठष्टशक्च 2025 के दौरान जॉर्ज के साथ तैयार की गई थी। इस अवसर पर प्रशिक्षण प्रमुख अलीना मुस्ताक तथा लुईस पाओला मिराबुएनो के योगदान की विशेष सराहना की गई। महाविद्यालय ने आशा व्यक्त की कि यह कार्यशाला प्रतिभागियों के ज्ञान, व्यावहारिक दक्षता एवं शिक्षण क्षमताओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ बायोइन्फॉर्मेटिक्स के क्षेत्र में शिक्षा और अनुसंधान को नई दिशा प्रदान करेगी। आयोजन सचिव एवं बायोटेक्नोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार ने डीएवी कॉलेज प्रबंध समिति, नई दिल्ली, स्थानीय समिति तथा प्राचार्या डॉ. (श्रीमती) एकता खोसला के निरंतर मार्गदर्शन, प्रेरणा एवं सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। कार्यशाला की सह-संयोजिका श्रीमती पूर्णिमा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने महाविद्यालय की सीनियर फैकल्टी डॉ . ममता, डीन अकादमिक्स डॉ. सीमा मरवाहा, फैकल्टी हेड साइंसेज एवं रसायन विज्ञान विभाग की अध्यक्ष श्रीमती दीपशिखा, भौतिक विज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ. सलोनी शर्मा, श्री सुमित शर्मा, डॉ. रमनदीप कौर, डॉ. रमा भाटिया, डॉ. राखी मेहता, श्रीमती नवनीता, सुश्री हरप्रीत कौर, डॉ. शुचि शर्मा, आतिथ्य व्यवस्था के लिए श्रीमती अलका, लोक ऑर्केस्ट्रा के लिए डॉ. रितु भारद्वाज, तकनीकी सहयोग के लिए श्री तरुण महाजन, श्री अरविंद एवं श्री केवल तथा सहयोगी कर्मचारी श्री तीरथ के योगदान की सराहना की। यह अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला श्रृंखला बायोइन्फॉर्मेटिक्स शिक्षा, व्यावहारिक प्रशिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में महाविद्यालय की प्रतिबद्धता को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई।



