डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर को हाल ही में सुप्रसिद्ध जापानी हिन्दीविद् श्री मिकी युइचिरो का स्वागत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। वे कॉलेज के एक प्रतिष्ठित पूर्व छात्र तथा विख्यात हिंदी उपन्यासकार उपेंद्रनाथ अश्क पर अपने शोधकार्य के संदर्भ में इस संस्थान में पधारे थे। अपनी धर्मपत्नी के साथ उन्होंने महाविद्यालय के पुस्तकालय तथा परिसर के उन विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों का अवलोकन किया, जो इस महान साहित्यकार की स्मृतियों से जुड़े हुए हैं।

अपने भ्रमण के दौरान श्री मिकी युइचिरो अत्यंत भाव-विभोर हो उठे। उन्होंने गहन उत्सुकता और श्रद्धा के साथ उन कक्षाओं, गलियारों, सभागारों तथा पुस्तकालय का अवलोकन किया, जहाँ कभी हिन्दी साहित्य की इस महान विभूति के चरण पड़े थे। यह यात्रा उनके लिए भावनात्मक रूप से अत्यंत समृद्ध तथा बौद्धिक रूप से प्रेरणादायी अनुभव सिद्ध हुई।

श्री मिकी युइचिरो एवं उनकी धर्मपत्नी का महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार, उप-प्राचार्य डॉ. कुॅंवर राजीव एवं श्रीमती सोनिका दानिया, रजिस्ट्रार प्रो. अशोक कपूर, प्रो. शरद मनोचा, पुस्तकालयाध्यक्षा श्रीमती श्वेता, डॉ. बलविंदर सिंह तथा डॉ. मनजीत सिंह द्वारा हार्दिक स्वागत किया गया। इस अवसर पर विद्वान अतिथि के साथ उपेंद्रनाथ अश्क के जीवन, उनके साहित्यिक अवदान तथा विश्व साहित्य में उनकी सतत प्रासंगिकता पर सारगर्भित एवं विचारोत्तेजक चर्चा हुई।

चर्चा के दौरान श्री मिकी युइचिरो ने अवगत कराया कि वे अश्क के प्रसिद्ध उपन्यास ‘गिरती दीवारें’ का जापानी भाषा में अनुवाद कर रहे हैं। उन्होंने यह आश्वासन भी दिया कि अनूदित कृति के प्रकाशित होने के उपरांत उसकी एक प्रति महाविद्यालय को भेंट करेंगे। अपने वचन का पालन करते हुए उन्होंने बाद में उपन्यास के जापानी अनुवाद की एक हस्ताक्षरित प्रति महाविद्यालय को प्रेषित की।

महाविद्यालय परिवार ने इस अनुपम सद्भावना के प्रति गहरा गौरव एवं कृतज्ञता व्यक्त की। यह भाव उपेंद्रनाथ अश्क की साहित्यिक विरासत की वैश्विक पहुँच तथा उनकी रचनाओं की चिरस्थायी लोकप्रियता का सशक्त प्रमाण है। प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार ने जापानी हिन्दीविद् के इस विद्वत्तापूर्ण प्रयास और सौहार्दपूर्ण भाव को आदरपूर्वक स्वीकार करते हुए इसे संस्थान के लिए गौरव एवं सम्मान का विषय बताया।