जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में मां बगलामुखी जी के निमित सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमानों सुनील लाल,अनिल शर्मा एवं सुनयना तांगडी से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई। सिद्ध मां बगलामुखी धाम में दिव्य हवन के पावन अवसर पर वातावरण अत्यंत अलौकिक और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत था। मंत्रों की गूंज, आहुति की सुगंध और भक्तों की श्रद्धा से भरे उस क्षण में धाम के प्रेरक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज जी ने माँ भक्तों को रामचरितमानस की एक अत्यंत प्रेरणादायक चौपाई का गूढ़ अर्थ समझाया—
*‘‘प्रात कहा मुनि सन रघुराई।*
*निर्भय जग्य करहु तुम्ह जाई॥*
*होम करन लागे मुनि झारी।*
*आपु रहे मख कीं रखवारी॥’’*
नवजीत भारद्वाज जी ने भावपूर्ण वाणी में कहा कि यह केवल दो पंक्तियाँ नहीं हैं, बल्कि यह जीवन का सार है, यह विश्वास का स्तंभ है और यह धर्म की अडिग विजय का उद्घोष है। जब भगवान श्रीराम इस धरती पर अवतरित हुए, तब उनका उद्देश्य केवल रावण जैसे अत्याचारी का अंत करना नहीं था, बल्कि हर उस हृदय में साहस और विश्वास का दीप जलाना था, जो भय के कारण धर्म से विचलित हो रहा था।
उन्होंने समझाया कि उस समय ऋषि-मुनि जैसे महान तपस्वी भी भयभीत थे। यज्ञ जैसे पवित्र कार्यों में राक्षस विघ्न डालते थे, हवन कुंड को अपवित्र कर देते थे और धर्म का उपहास करते थे। सोचिए, जब धर्म के रक्षक ही डर जाएँ, तो समाज की स्थिति कैसी हो जाती है? अंधकार चारों ओर फैल जाता है।
इसी भय के वातावरण में प्रभु श्रीराम ने आगे बढ़कर मुनियों से कहा,
*“निर्भय होकर यज्ञ करो, मैं स्वयं तुम्हारी रक्षा के लिए खड़ा हूँ।”*

नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि यह वचन केवल त्रेता युग तक सीमित नहीं है, यह हर युग के लिए है। आज के लिए भी, हमारे जीवन के लिए भी। आज भी हमारे जीवन में ‘राक्षस’ हैं—कभी वह डर के रूप में सामने आते हैं, कभी नकारात्मक सोच बनकर, कभी अन्याय और भ्रष्टाचार के रूप में, तो कभी हमारे अपने ही मन की कमजोरी बनकर।
उन्होंने गहराई से समझाया कि हम अक्सर सत्य जानते हुए भी चुप रह जाते हैं, सही होते हुए भी डर जाते हैं, और धर्म को पहचानते हुए भी उससे दूर हो जाते हैं। यही हमारी सबसे बड़ी कमजोरी है।
नवजीत भारद्वाज जी ने भावुक स्वर में कहा, “यदि आपका मार्ग सत्य और धर्म का है, तो भय का कोई स्थान नहीं होना चाहिए।”
धर्म का मार्ग कभी सरल नहीं होता। यह कांटों से भरा होता है, इसमें संघर्ष होता है, परीक्षा होती है। लेकिन याद रखिए जहाँ संघर्ष है, वहीं विकास है। जहाँ परीक्षा है, वहीं सफलता है और जहाँ धर्म है, वहाँ स्वयं भगवान की उपस्थिति होती है।
उन्होंने आगे कहा कि *यदि हम कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य और धर्म से पीछे नहीं हटते, तो हमारा जीवन भी एक यज्ञ बन जाता है। उस यज्ञ में हमारे अच्छे कर्म आहुति बनते हैं, हमारी निष्ठा घी बनती है और प्रभु की कृपा उस यज्ञ की रक्षा करती है*।
प्रवचन के अंत में उन्होंने भक्तों को प्रेरित करते हुए कहा,*“डर को त्यागिए, विश्वास को अपनाइए। अधर्म से दूर रहिए और धर्म के मार्ग पर अडिग रहिए। अपने जीवन में प्रभु श्रीराम को अपना रक्षक बना लीजिए,क्योंकि जहाँ धर्म है, वहाँ विजय है। जहाँ सत्य है, वहाँ प्रकाश है और जहाँ प्रभु श्रीराम हैं, वहाँ भय का कोई अस्तित्व नहीं है*।”

इस अवसर पर श्वेता भारद्वाज, राकेश प्रभाकर,सरोज बाला, समीर कपूर, विक्की अग्रवाल, अमरेंद्र कुमार शर्मा,नरेश,कोमल,ऋषभ कालिया,रिंकू सैनी, कमलजीत,उदय ,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,बावा जोशी,राकेश शर्मा,रवि कुमार,नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत,मनीष शर्मा, डॉ गुप्ता,दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा, ऐडवोकेट शर्मा,वरुण, नितिश,रोमी, भोला शर्मा,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा,रवि भल्ला,जगदीश,निर्मल,अनिल,सागर,दीपक,प्रिंस कुमार, पप्पू ठाकुर, दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, नरेश,दिक्षित, अनिल, कमल नैयर, अजय सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।

हवन यज्ञ उपरांत विशाल लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।