पंजाबशिक्षा और संस्कृति

एचएमवी मूल्य-आधारित शिक्षा की ओर अग्रसर

हंसराज महिला महाविद्यालय, जालंधर में तीन दिवसीय ‘सार्वभौमिक मानव मूल्यÓ विषय पर प्राचार्या डॉ एकता खोसला के दिशानिर्देशन अधीन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का द्वितीय दिवस उत्साहपूर्ण एवम ज्ञानवर्धक रहा। यह आयोजन आल इंडिया कौंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन के अनुमोदन से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सकारात्मक ऊर्जा से शुरू हुआ। कार्यशाला का प्रथम दिवस उत्साह एवं सक्रिय सहभागिता के साथ सपन्न हुआ। सत्र की शुरुआत शिक्षा के मूल उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए की गई, जिसमें बताया गया कि वास्तविक शिक्षा केवल जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि सही समझ , संबंध तथा भौतिक सुविधाओं के संतुलित विकास पर आधारित होती है। मुय वक्ता श्री जतिंदर नरूला एवम सुश्री रजनीत ने अपने विचारों के माध्यम से इन तीनों आयामों की महत्ता को स्पष्ट किया और बताया कि ये एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं तथा जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए समान रूप से आवश्यक हैं। विशेष रूप से मानव चेतना के विषय पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें स्वयं को समझने और आत्म-जागरूकता विकसित करने पर जोर दिया गया। सत्र का एक महत्वपूर्ण पहलू स्वयं में सामंजस्य को समझना रहा। प्रतिभागियों को अपने विचारों, भावनाओं और व्यवहार में संतुलन स्थापित करने के लिए प्रेरित किया गया। वक्ता ने बताया कि जब व्यक्ति के भीतर सामंजस्य स्थापित होता है, तो उसका प्रभाव उसके संबंधों, समाज और प्रकृति के साथ उसके व्यवहार में भी दिखाई देता है। सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने अपने अनुभव और विचार साझा किए, जिससे वातावरण और अधिक संवादात्मक एवं प्रेरणादायक बन गया। कुल मिलाकर, द्वितीय दिवस ने सार्वभौमिक मानव मूल्यों की समझ विकसित करने की मजबूत नींव रखी और सभी को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया। प्राचार्या डॉ. एकता खोसला ने अपने संदेश में कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञानर्जित करना नहीं, बल्कि एक जिमेदार और संवेदनशील नागरिक का निर्माण करना है। उन्होंने बताया कि सार्वभौमिक मानव मूल्य आधारित यह एफडीपी शिक्षकों को आत्मचिंतन, सही समझ और मानवीय मूल्यों के साथ जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षक स्वयं इन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाते हैं, तभी वे विद्यार्थियों को सही दिशा प्रदान कर सकते हैं। ऐसे कार्यक्रम शिक्षा में गुणवत्ता के साथ-साथ नैतिकता और संतुलन स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डॉ. रमनीता सैनी शारदा, प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर ने बताया कि सार्वभौमिक मानव मूल्य कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों में सही समझ और मानवीय मूल्यों का विकास करना है। यह पहल शिक्षा को अधिक सार्थक, संतुलित और जीवनोपयोगी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्यशाला के आगामी दिनों में इन विषयों पर और गहन चर्चा की जाएगी। मंच संचालन डॉ ज्योति गोगिया द्वारा किया गया। अंत में श्री सुमित शर्मा सह-प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर द्वारा आभार व्यक्त किया गया। इस एफडीपी में विभिन्न संस्थाओं, पीटीयू कपूरथला, सरकारी कालेज कपूरथला, सेंट सोल्जर कालेज, एस.आई.टी. और डेवियट ने भी भागीदारी की।

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