
डी.ए.वी.आई.ई.टी. द्वारा विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए पाँच दिवसीय ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ वेलनेस कार्यशाला का आयोजन

डी.ए.वी. इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (DAVIET), जालंधर के ह्यूमन वैल्यूज़ सेल द्वारा आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के सहयोग से विद्यार्थियों के लिए पाँच दिवसीय ‘आर्ट ऑफ लिविंग वेलनेस एंड इनर-स्ट्रेंथ वर्कशॉप’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में समग्र कल्याण, भावनात्मक दृढ़ता, सजगता (माइंडफुलनेस) और आंतरिक शक्ति को बढ़ावा देना था।
कार्यशाला का संचालन आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन की लाइफ कोच एवं मेडिटेशन एक्सपर्ट सुश्री सलोनी और श्री विनोद सोनी द्वारा किया गया। सत्रों के दौरान विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन, एकाग्रता, भावनात्मक संतुलन तथा जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की व्यावहारिक तकनीकों से परिचित कराया गया।
पाँच दिवसीय कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने श्वास-अभ्यास, योग, ध्यान, माइंडफुलनेस और जीवन-कौशल से संबंधित सत्रों में भाग लिया। उन्हें उज्जायी एवं भस्त्रिका जैसे श्वास-अभ्यासों, निर्देशित ‘ब्रीद एंड लेट गो’ सत्रों, योग तथा शारीरिक मुद्रा एवं स्वास्थ्य से संबंधित अभ्यासों का प्रशिक्षण दिया गया। संवादात्मक सत्रों में शैक्षणिक तनाव, साथियों का दबाव, डिजिटल विचलन, संचार, भावनात्मक बुद्धिमत्ता तथा मानसिक दृढ़ता विकसित करने जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई।
डॉ. कंचन एल. सिंह, प्रमुख, एप्लाइड साइंसेज़ विभाग एवं संयोजक, ह्यूमन वैल्यूज़ सेल ने कार्यशाला के आयोजन एवं समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से आयोजित यह पहल विद्यार्थियों के समग्र विकास में मानवीय मूल्यों, वेलनेस और अनुभवात्मक शिक्षा को समाहित करने के संस्थान के प्रयासों को दर्शाती है।
कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण संस्थान के माननीय डायरेक्टर-कम-प्रिंसिपल डॉ. संदीप विज के साथ विद्यार्थियों की संवादात्मक बैठक रही, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभव एवं सीख साझा की। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक बताया कि कार्यक्रम से उनकी एकाग्रता में सुधार, ऊर्जा में वृद्धि, आत्मविश्वास में बढ़ोतरी तथा दैनिक चुनौतियों के प्रति अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित हुआ। उन्होंने माइंडफुलनेस, वर्तमान क्षण में जीने तथा जीवन के प्रति संतुलित दृष्टिकोण अपनाने के महत्व को भी रेखांकित किया।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. विज ने उनकी सक्रिय भागीदारी की सराहना की तथा कार्यशाला के दौरान सीखी गई तकनीकों और मूल्यों को दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सार्थक शिक्षा कक्षा तक सीमित नहीं रहती तथा विद्यार्थियों को विभिन्न गतिविधियों, परियोजनाओं, सामुदायिक पहलों, शिक्षण एवं स्वयंसेवी कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को आत्म-जागरूकता, सहानुभूति तथा दूसरों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे अनुभव विद्यार्थियों को जिम्मेदार नागरिक बनने में सहायता करते हैं, जो समाज में सार्थक योगदान दे सकें। डॉ. विज ने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए डॉ. कंचन एल. सिंह के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की पहल विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, सामाजिक जागरूकता, व्यावहारिक कौशल और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इस अवसर पर डॉ. अशोक कुमार एवं डॉ. शिवानी विज भी उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को माइंडफुलनेस, आत्म-जागरूकता और सकारात्मक जीवनशैली को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम के सफल समापन पर विद्यार्थियों को उनकी सक्रिय भागीदारी तथा व्यक्तिगत कल्याण और समग्र विकास के प्रति प्रतिबद्धता के लिए प्रशंसा-पत्र/सहभागिता प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
यह पहल डी.ए.वी.आई.ई.टी. की समग्र शिक्षा, मानवीय मूल्यों और विद्यार्थी कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा के साथ ऐसे अनुभवों को जोड़ती है, जो विद्यार्थियों को आत्मविश्वासी, भावनात्मक रूप से संतुलित, सामाजिक रूप से जिम्मेदार और दृढ़ व्यक्तित्व के रूप में विकसित करने में सहायक हैं।



