
डी.ए.वी. यूनिवर्सिटी द्वारा पंजाब की सामाजिक चुनौतियों, नैतिक मूल्यों और डिजिटल जिम्मेदारी पर पैनल डिस्कशन सफलतापूर्वक आयोजित

डी.ए.वी. यूनिवर्सिटी, जालंधर में ‘गल्ल पंजाब दी: तूतां वाले खूह ते’ विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर ‘हमारी सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिकता’ विषय पर विचार-विमर्श किया गया। चर्चा के दौरान पंजाब की प्रमुख सामाजिक समस्याओं, जैसे भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, नशे की समस्या, नैतिक मूल्यों में गिरावट और युवाओं पर सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर विचार साझा किए गए।
कार्यक्रम की शुरुआत डी.ए.वी. यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर प्रो. (डॉ.) मनोज कुमार के संबोधन से हुई। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का चरित्र उसके व्यवहार और जीवन जीने के तरीके से झलकता है। आज के सूचना-प्रधान वातावरण पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जरूरत से ज्यादा जानकारी युवाओं की सोचने-समझने की क्षमता और सही निर्णय लेने की योग्यता को प्रभावित कर सकती है।
प्रो. कुमार ने सोशल मीडिया के दस ऐसे जालों के बारे में भी बताया, जिनके माध्यम से डिजिटल प्लेटफॉर्म लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं और उनकी सोच को प्रभावित करते हैं। उन्होंने फर्जी खबरों और भ्रामक जानकारी के लगातार प्रसार पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि युवाओं में तथ्यों की जांच करने, सोच-समझकर निर्णय लेने और डिजिटल माध्यमों का जिम्मेदारी से उपयोग करने की आदत विकसित करना आवश्यक है।
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट श्री बलतेज सिंह ढिल्लों ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अपने विचार रखते हुए कहा कि आम नागरिक भी कई बार रिश्वत मांगने या देने वाले कुछ लोगों के दबाव में आकर अनजाने में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह नैतिक मूल्यों को अपनाए, रिश्वत की मांग का विरोध करे और भ्रष्ट गतिविधियों में भागीदार न बने। उन्होंने लोगों से अपने दैनिक जीवन में ईमानदारी अपनाने और एक नैतिक समाज के निर्माण में योगदान देने की अपील की।
रामगढ़िया कॉलेज, फगवाड़ा से प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अवतार सिंह ने परीक्षा के अंकों और वास्तविक शिक्षा के बीच अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने विद्यार्थियों को अंकों के बजाय ज्ञान प्राप्त करने को प्राथमिकता देने की सलाह देते हुए कहा, “शिक्षा के पीछे भागें, अंक अपने आप मिल जाएंगे।” उन्होंने पात्रता और वास्तविक क्षमता के बीच अंतर पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डिग्री किसी अवसर के लिए पात्र बना सकती है, लेकिन किसी कार्य को प्रभावी ढंग से करने के लिए वास्तविक ज्ञान, कौशल और क्षमता होना जरूरी है।
मोटिवेशनल स्पीकर एवं लाइफ कोच श्रीमती तरवीन कौर ने भ्रामक जानकारी के बढ़ते खतरे पर चर्चा करते हुए किसी भी जानकारी पर विश्वास करने या उसे आगे साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करने पर जोर दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर आगे भेजे जाने वाले संदेशों की तुलना ‘चाइनीज व्हिस्पर्स’ नामक खेल से की, जिसमें एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचते-पहुंचते मूल संदेश बदल जाता है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन जानकारी साझा करने से पहले तथ्यों की जांच करना और बिना पुष्टि किए गए दावों पर सवाल उठाना बेहद जरूरी है।
डी.ए.वी. विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की कोऑर्डिनेटर डॉ. प्रतिमा शर्मा ने सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया की लत व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य, मनोदशा और मानसिक कल्याण को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने ‘डूमस्क्रॉलिंग’ की आदत के बारे में भी बताया, जिसमें व्यक्ति लंबे समय तक नकारात्मक या परेशान करने वाली ऑनलाइन सामग्री देखता रहता है। उन्होंने इस आदत से बचने के लिए सोशल मीडिया के उपयोग का समय निर्धारित करने और स्वस्थ डिजिटल आदतें अपनाने की सलाह दी।
इस अवसर पर राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित श्री मनिंदर सिंह ने समाज सेवा के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने समाज सेवा के लिए स्वयं को समर्पित किया, तो शुरुआत में लोग उनका मजाक उड़ाते थे। लेकिन राष्ट्रपति पुरस्कार मिलने के बाद उन्हीं लोगों का व्यवहार पूरी तरह बदल गया और वे उन्हें बधाई देने लगे। युवाओं को अपने लक्ष्यों के प्रति दृढ़ रहने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा, “अपने हौसले को कभी कमजोर न पड़ने दें।”
सुश्री बरुन कौर मान ने शिक्षा में नैतिकता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नैतिक मूल्यों के बिना वास्तविक शिक्षा प्राप्त नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि ज्ञान तभी सार्थक बनता है, जब उसके साथ ईमानदारी, करुणा और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना जुड़ी हो।
डॉ. कमलजीत कौर सिद्धू, डीन, स्टूडेंट्स वेलफेयर ने इस अवसर पर सभी मेहमानों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस विचार-विमर्श में यह बात सामने आई कि वर्तमान सामाजिक चुनौतियों का सामना करने के लिए नैतिक आचरण, सार्थक शिक्षा, मीडिया साक्षरता और तकनीक का जिम्मेदारी से उपयोग करना बेहद जरूरी है। चर्चा में इस बात पर भी जोर दिया गया कि समाज में ईमानदारी, आलोचनात्मक सोच और जागरूक नागरिकता की भावना विकसित करने के लिए व्यक्तियों, शैक्षणिक संस्थानों और पूरे समाज को मिलकर प्रयास करने चाहिए। विशेष रूप से युवाओं में इन मूल्यों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
इस पहल के माध्यम से डी.ए.वी. विश्वविद्यालय ने सामाजिक मुद्दों पर सार्थक संवाद को बढ़ावा देने तथा युवाओं में नैतिक जागरूकता, जिम्मेदार संवाद और सर्वांगीण विकास की भावना विकसित करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।



