

जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक ho लमांपिंड चौंक जालंधर में सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान राजेश कुमार,वेद प्रकाश, ग़ौरी शर्मा से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध माँ बगलामुखी धाम, गुलमोहर सिटी में आयोजित दिव्य हवन-यज्ञ के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, यज्ञ कुंड में प्रज्वलित पावन अग्नि और श्रद्धापूर्वक दी गई आहुतियों से समूचा वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस पावन अवसर पर धाम के संस्थापक एवं व्यवस्थापक नवजीत भारद्वाज ने माँ भक्तों को धर्म, दान, सेवा और परोपकार की महिमा समझाते हुए संत कबीरदास जी के प्रेरणादायक दोहे के माध्यम से जीवन में उदारता का महत्व बताया।
उन्होंने संत कबीरदास जी का दोहा सुनाते हुए कहा कि
*‘‘धर्म किये धन ना घटे, नदी न घट्ट नीर।*
*अपनी आँखों देखिले, यों कथि कहहिं कबीर॥’’*
नवजीत भारद्वाज जी दोहे का भावार्थ समझाते हुए कहते है कि संत कबीर दास जी की यह वाणी समाज को एक बहुत बड़ा संदेश देती है। आज के भौतिकवादी युग में मनुष्य हर समय यही सोचता रहता है कि मैं जोड़ लूं,इकट्ठा कर लूं, और खर्च करने से कतराता है। उसे डर रहता है कि यदि मैंने धन दान किया या किसी की सहायता की, तो मेरा खजाना खाली हो जाएगा। संत कबीर साहब इसी भ्रम को तोड़ते हुए कहते हैं कि धर्म, परोपकार और भलाई के कार्यों से कभी धन घटता नहीं है, बल्कि वह बढ़ता है।
नवजीत भारद्वाज जी ने माँ भक्तों को समझाते हुए कहा कि संत कबीर दास जी ने अपनी बात को समझाने के लिए प्रकृति का बहुत ही सुंदर और जीवंत उदाहरण दिया है *-‘‘नदी न घट्ट नीर’’।*
एक नदी को देखिए। वह कभी भी अपना पानी खुद नहीं पीती, वह लगातार बहती रहती है, अपनी प्यास बुझाने के लिए औरों को जल देती है।
उन्होंने कहा कि क्या आपने कभी देखा है कि लगातार बहने और पानी देने से नदी सूख गई हो? उल्टे, जितना जल वह आगे बहाती है, स्रोत से उतना ही नया और स्वच्छ जल और अधिक मात्रा में आ जाता है। ठीक इसी प्रकार, जो मनुष्य अपने धन का सदुपयोग परोपकार, सेवा, और धर्म-कर्म में करता है, उसका धन भी नदी के नीर की भांति कभी कम नहीं होता। देने वाले हाथ हमेशा ऊपर रहते हैं और ब्रह्मांड का नियम है कि वह किसी न किसी रूप में उस भलाई को सौ गुना करके वापस लौटा देता है।
नवजीत भारद्वाज जी ने दोहे की गहराई समझाते हुए माँ भक्तों को कहा कि संत कबीर साहब आगे बहुत विश्वास के साथ कहते हैं, *‘‘अपनी आँखों देखिले’’।* यानी इसे किसी सुनी- सुनाई बात पर मत छोड़ो, अपने आस-पास और जीवन में झाँककर खुद देख लो। जो लोग कंजूसी करके केवल तिजोरियां भरते रह जाते हैं, अंत में वह धन या तो बिखर जाता है या उनके किसी काम नहीं आता।
इसके विपरीत, जो लोग उदार हृदय होते हैं, समाज सेवा करते हैं और धर्म के मार्ग पर चलते हैं, उनके जीवन में सुख-शांति, यश और बरकत हमेशा बनी रहती है। उनके यहाँ अन्न और धन के भंडार कभी खाली नहीं होते।
नवजीत भारद्वाज जी ने माँ भक्तों को बड़ी विनम्रता से संदेश देते हुए कहा कि संत कबीर साहब हमें यह सिखाना चाहते हैं कि धन का असली मूल्य उसे जोडक़र रखना नहीं, बल्कि उसका सही उपयोग करना है। जब हम अपने खून पसीने की कमाई में से कुछ हिस्सा दीन-दुखियों, समाज और धर्म के कार्यों में लगाते हैं, तो वह धन पवित्र हो जाता है। आइए, आज हम सभी संत कबीर साहब की इस सीख को अपने जीवन में उतारें। संकीर्णता को छोडक़र उदारता का मार्ग चुनें, क्योंकि धर्म करने से कभी धन नहीं घटता, बल्कि जीवन धन्य हो जाता है।
इस अवसर पर अमरेंद्र कुमार शर्मा,राकेश प्रभाकर,पूनम प्रभाकर ,सरोज बाला, समीर कपूर,रोहित भाटिया,अजीत कुमार , नरेंद्र,राकेश शर्मा,प्रदीप, सुधीर, सुमीत,मनीष शर्मा, दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू,संजीव शर्मा,मुकेश,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह,वरुण, नितिश,रोमी, भोला शर्मा,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा,निर्मल,अनिल,सागर सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।
हवन उपरांत विशाल लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।



