दिल्ली: भारत से हजारों करोड़ रुपये लेकर चंपत हुए भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ब्रिटेन की एक अदालत ने नीरव मोदी को करारा झटका देते हुए आदेश दिया है कि वह बैंक ऑफ इंडिया को $10.7 मिलियन की भारी-भरकम राशि का भुगतान करे। लंदन की सर्किट कमर्शियल कोर्ट के जज साइमन टिंकलर ने बैंक के दावे को पूरी तरह सही और वैध माना है। नीरव मोदी फिलहाल लंदन की एक जेल में बंद है और भारत प्रत्यर्पण से बचने के लिए कानूनी तिकड़मों में लगा हुआ है, लेकिन इस नए फैसले ने उसकी कमर तोड़ दी है यह पूरा विवाद साल 2012 का है, जब बैंक ऑफ इंडिया ने दुबई में स्थित नीरव मोदी की कंपनी डायमंड FZE को एक बड़ा लोन दिया था। अगस्त 2013 में नीरव मोदी ने खुद इस लोन के लिए पर्सनल गारंटर के तौर पर साइन किए थे। यानी कंपनी के पैसे न चुकाने पर जिम्मेदारी नीरव की थी। कोर्ट में नीरव मोदी ने अजीबोगरीब दलीलें दीं। उसने दावा किया कि बैंक का यह नियम उन पर लागू नहीं होता और बैंक ने कभी उनसे पैसों की सही तरीके से मांग ही नहीं की।55 साल के नीरव मोदी को 19 मार्च 2019 को लंदन में गिरफ्तार किया गया था। तब से वह सलाखों के पीछे है। भारत सरकार उसे वापस लाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। नीरव मोदी ने हाल ही में भारत के प्रत्यर्पण आदेश को चुनौती देने के लिए एक नया पैंतरा आजमाया था। उसने कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला देकर दावा किया था कि भारत की जेलों में ‘यातना’ दी जाती है। लेकिन यूके हाई कोर्ट ने भारत सरकार के आश्वासनों पर भरोसा जताते हुए उसकी याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।