चंडीगढ़, 1 मई

भाजपा द्वारा बुलाई गई “जनता की विधानसभा” को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि आज विधानसभा सत्र में अपने आचरण के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार पूरी तरह खो दिया है।

जाखड़ ने इस दिन को पंजाब के लोकतंत्र के इतिहास का काला दिन बताया और कहा कि पार्टी राज्यपाल से मिलकर यह मांग करेगी कि मुख्यमंत्री इस पद के योग्य नहीं हैं। इससे पहले, विशेष विधानसभा सत्र से पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर विधानसभा में आने वाले नेताओं के लिए ब्रेथ एनालाइज़र टेस्ट कराने की मांग की थी—जो आमतौर पर पुलिस द्वारा शराब सेवन की जांच के लिए किया जाता है।

सभा को संबोधित करते हुए जाखड़ ने कहा कि सरकार को फ्लोर टेस्ट कराने की बजाय अल्कोहल टेस्ट कराना चाहिए था। उन्होंने कहा कि जहां आमतौर पर विपक्ष विधानसभा का बहिष्कार करता है, आज तो स्वयं मुख्यमंत्री ही अपने व्यवहार और आचरण पर सवाल उठने पर सदन से बाहर चले गए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने न केवल विधानसभा की गरिमा का अपमान किया बल्कि गुरुओं द्वारा प्रदत्त पगड़ी का भी अनादर किया। उनका कहना था कि चाहे कितने भी विधायक उनके साथ हों, मुख्यमंत्री जनता का विश्वास खो चुके हैं।

जाखड़ ने आगे आरोप लगाया कि सत्र से पहले एक बैठक में मंत्रियों अमन अरोड़ा और संजीव अरोड़ा तथा पंजाब के मुख्य सचिव को बुरी तरह अपमानित किया गया। उन्होंने हैरानी जताई कि इतनी बेइज्जती के बावजूद मंत्री सत्ता के लालच में सरकार में बने हुए हैं।

उन्होंने कहा कि यह सत्र मजदूरों के नाम पर बुलाया गया, लेकिन असल मकसद सरकार के लिए छह महीने की मोहलत लेना था। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब लगभग ₹4.5 लाख करोड़ के कर्ज में डूबा है, भ्रष्टाचार सारी सीमाएं पार कर चुका है और कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद गंभीर है, जबकि आप सरकार विज्ञापन से आगे नहीं बढ़ पाई है।

केंद्र सरकार से मिल रही वित्तीय सहायता का जिक्र करते हुए जाखड़ ने कहा कि नहरों के पानी से जुड़े प्रोजेक्ट के लिए पूरा पैसा केंद्र से आ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब को विशेष सहायता योजना के तहत केंद्र सरकार से करोड़ों रुपये मिले हैं।

उन्होंने दावा किया कि पंजाब की जनता इस सरकार को परख चुकी है और इसे हटाने के लिए तैयार है। उनके अनुसार, आप नेतृत्व ने पंजाब को एटीएम बना दिया है और सत्ता छोड़ने से पहले अधिकतम लूट करना चाहता है। उन्होंने नियमों के खिलाफ काम कर रहे अधिकारियों को भी चेतावनी दी कि उनकी संपत्तियों और कारोबार की जानकारी सबको है।

इस सत्र में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित किया गया। साथ ही, नशे के कारण जान गंवाने वाले 1600 से अधिक युवाओं, डीएम गगनदीप सिंह रंधावा, गैंगस्टर हिंसा के शिकार लोगों और सरकार की विफलता के कारण आई बाढ़ में मारे गए लोगों के लिए शोक प्रस्ताव भी पारित किए गए।