अयोध्या: राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बीच अब सबकी निगाहें स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। सूत्रों के अनुसार, विशेष जांच दल ने अपनी जांच लगभग पूरी कर ली है और करीब 140 पन्नों की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली है। जांच रिपोर्ट यह स्पष्ट कर सकती है कि मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को पूरी तरह राहत मिलेगी या फिर उनसे जुड़े कुछ सवालों का जवाब मांगा जाएगा। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चंपत राय लंबे समय से सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं। मंदिर निर्माण की पूरी प्रक्रिया में उनकी अहम भूमिका रही है। ऐसे में मंदिर के संचालन और दान प्रबंधन से जुड़े किसी भी विवाद में उनकी जिम्मेदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।जांच के दौरान कुछ सेवादारों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट में इन पहलुओं को विस्तार से दर्ज किया गया है। इसी आधार पर यह संभावना जताई जा रही है कि मंदिर से जुड़े कुछ सेवादारों की सेवाएं आगे चलकर समाप्त की जा सकती हैं। हालांकि अभी तक किसी भी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े चंपत राय दशकों से राम मंदिर आंदोलन का हिस्सा रहे हैं। उनके समर्थक उन्हें सादगीपूर्ण जीवन जीने वाला, अनुशासित और समर्पित कार्यकर्ता बताते हैं। हालांकि, उनके विरोधियों का कहना है कि कई मौकों पर उन्होंने फैसलों में दूसरे पक्षों की राय को ज्यादा महत्व नहीं दिया। यही वजह है कि ट्रस्ट के गठन के बाद कुछ संतों और आंदोलन से जुड़े पुराने लोगों में असंतोष देखने को मिला