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*सुख मिले तो राम कहिए, दुख मिले तो भी राम कहिए-नवजीत भारद्वाज

जालंधर:- सिद्ध मां बगलामुखी धाम, गुलमोहर सिटी में श्री शनिदेव महाराज जी के निमित आयोजित दिव्य हवन यज्ञ के दौरान यज्ञ कुंड में प्रज्वलित पावन अग्नि, वैदिक मंत्रोच्चार और आहुतियों की सुगंध से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
इस पावन अवसर पर धाम के संस्थापक एवं व्यवस्थापक नवजीत भारद्वाज ने गोस्वामी तुलसीदास जी के प्रसिद्ध चौपाई माध्यम से माँ भक्तों को भगवान श्रीराम नाम जी की अलौकिक महिमा की व्याख्या करते हुए कहा कि
*दोउ अक्षर मधुर मनोहर जान।*
*लोचन जगत जीव के प्रान॥*
*सुगम सुसाहिब सुमिरत सुखदाता।*
*हितकारी, राम नाम जगत्राता॥*
अर्थात राम नाम के दो अक्षर- ‘रा’ और ‘म’ इतने मधुर और मनोहर हैं कि ये समस्त जगत के प्राणों के समान हैं। इन दो अक्षरों में ऐसी शक्ति है, जो निराश मनुष्य के भीतर आशा जगा सकती है, टूटे हुए हृदय को सहारा दे सकती है और भटके हुए मनुष्य को प्रभु की भक्ति के मार्ग पर ला सकती है।
नवजीत भारद्वाज जी ने माँ भक्तों को कहा कि राम नाम में केवल दो अक्षर हैं ‘रा’ और ‘म’। बोलने में कुछ ही क्षण लगते हैं, लेकिन इसका आध्यात्मिक संदेश जीवनभर मनुष्य का मार्गदर्शन कर सकता है। जरा सोचिए, संसार में बड़ी-बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए मनुष्य कितने दरवाजे खटखटाता है। कभी किसी व्यक्ति के सामने हाथ जोड़ता है, कभी धन के पीछे भागता है, कभी अपनी परेशानियों का उत्तर संसार में ढूंढ़ता है। लेकिन जब मन अशांत हो, तब प्रभु के चरणों में बैठकर प्रेम से राम नाम का स्मरण करना भी मन को संभालने का एक सुंदर माध्यम बन सकता है।
नवजीत भारद्वाज जी ने माँ भक्तों को कहा कि आज मनुष्य धन कमाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहा है। धन आज है, कल कम हो सकता है। पद आज है, कल किसी दूसरे के पास जा सकता है। संसार की प्रशंसा आज मिलती है, कल आलोचना में बदल सकती है। लेकिन प्रभु के प्रति सच्ची श्रद्धा मनुष्य को कठिन समय में भी नैतिकता, करुणा और सदाचार का मार्ग याद दिला सकती है। जिस हृदय में राम नाम का दीपक जलता है, वहां अहंकार का अंधकार मिटाने का प्रयास शुरू हो जाता है।
नवजीत भारद्वाज ने माँ भक्तों को चौपाई की गहराई समझाते हुए कहा कि *सुगम सुसाहिब सुमिरत सुखदाता।*
*हितकारी, राम नाम जगत्राता॥*
इस चौपाई का भाव है कि राम नाम का स्मरण सहज है, सुख देने वाला है, सबका हित करने वाला है और प्रभु की महिमा का गुणगान मनुष्य को कल्याण के मार्ग पर प्रेरित करता है।
नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि भक्ति के लिए यह आवश्यक नहीं कि आपके पास बहुत धन हो। यह आवश्यक नहीं कि आप किसी ऊंचे पद पर हों। यह भी आवश्यक नहीं कि आप संसार से दूर किसी जंगल में जाकर बैठ जाएं। आप गृहस्थ हैं तो घर में रहते हुए राम नाम जप सकते हैं। आप काम पर जाते हैं तो मन ही मन प्रभु का स्मरण कर सकते हैं। आप किसान हैं, मजदूर हैं, दुकानदार हैं, विद्यार्थी हैं या किसी कार्यालय में काम करते हैं हर व्यक्ति अपने जीवन में प्रभु स्मरण के लिए समय निकाल सकता है। राम नाम पर किसी अमीर का अधिकार नहीं, किसी गरीब की मनाही नहीं; प्रभु की भक्ति का द्वार श्रद्धा और प्रेम से सबके लिए खुला है।
नवजीत भारद्वाज जी ने प्रवचन के अंत में माँ भक्तों को विन्रम होकर संदेश देते हुए कहा कि सुख मिले तो राम कहिए, दुख मिले तो भी राम कहिए।
इस अवसर पर श्वेता भारद्वाज,राकेश प्रभाकर,पूनम प्रभाकर ,सरोज बाला, समीर कपूर, विक्की अग्रवाल, अमरेंद्र कुमार शर्मा, रोहित भाटिया,विवेक अग्रवाल, जानू थापर, ऋषभ कालिया,अजीत कुमार , नरेंद्र,राकेश शर्मा, अमरेंद्र सिंह, नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत,मनीष शर्मा, दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू,संजीव शर्मा,मुकेश,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह,वरुण, नितिश,रोमी, भोला शर्मा,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा , रवि भल्ला, भोला शर्मा, जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।
हैवानिया के उपरांत लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।

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