
जालंधर: भारत के क्रिएटिव सेक्टर को मजबूत करने और उभरती हुई ऑरेंज इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों के तहत, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आज ‘जेम्स ऑफ इंडिया’ चैलेंज के पायलट चरण का शुभारंभ किया। यह एक संरचित राष्ट्रीय पहल है जिसका उद्देश्य देश भर से जमीनी स्तर के डिजिटल क्रिएटर की पहचान करना, उनका पोषण करना और उन्हें बढ़ावा देना है।
माननीय प्रधानमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने प्रौद्योगिकी को सशक्तिकरण, समावेशन और राष्ट्र निर्माण के एक शक्तिशाली साधन के रूप में अपनाया है। डिजिटल इंडिया जैसी पहलों ने प्रौद्योगिकी तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाया है और अभूतपूर्व स्तर पर नवाचार के अवसर पैदा किए हैं।
यह पहल, सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव द्वारा शुरू किए गए वेव्स ओटीटी के अंतर्गत सिटिजन क्रिएटर प्लेटफॉर्म MyWAVES पर आधारित है। इसका उद्देश्य नागरिकों को मौलिक विषय सामग्री तैयार करने, अपलोड करने और साझा करने में सक्षम बनाने के साथ ही भारत के डिजिटल क्रिएटर इकोसिस्टम को मजबूत करना है। उपयोगकर्ता-निर्मित सामग्री को प्रोत्साहित करने और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच के रूप में परिकल्पित MyWAVES अब ‘जेम्स ऑफ इंडिया चैलेंज’ का आधार प्रदान करता है, जो क्रिएटर को प्रामाणिक डिजिटल स्टोरी टेलिंग के माध्यम से अपने जिलों की अनूठी कहानियों को बताने के लिए आमंत्रित करता है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव श्री चंचल कुमार ने कहा कि “भारत के हर जिले में एक कहानी छिपी है जिसे सुनाए जाने का इंतजार है, और ‘जेम्स ऑफ इंडिया’ हमारे रचनाकारों को इसे सुनाने का मंच प्रदान करता है। यह कार्यक्रम न केवल हमारे युवाओं की रचनात्मकता का जश्न मनाता है, बल्कि हमारे जिलों की असाधारण विविधता का भी जश्न मनाता
इस चैलेंज में शामिल होने के लिए, क्रिएटर वेव्स ओटीटी प्लेटफॉर्म पर MyWAVES सेक्शन के माध्यम से 1 से 3 मिनट की अवधि के वीडियो सबमिट कर सकते हैं। पायलट चरण के लिए सबमिशन विंडो 1 अगस्त, 2026 से लेकर 31 अगस्त, 2026 तक खुली रहेगी।यह पायलट चरण अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, गोवा और लद्दाख में शुरू किया जा रहा है। यह चरण प्रसार भारती, माय भारत और संबंधित राज्य एवं जिला प्रशासनों के सहयोग से चलाया जा रहा है। रचनाकारों को संगठित करने और सामग्री विकसित करने में स्थानीय सांस्कृतिक और शैक्षणिक संस्थान भी सक्रिय रूप से शामिल होंगे।
इस पहल को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए, मंत्रालय यूट्यूब और मेटा जैसी इंडस्ट्री की दिग्गज कंपनियों के साथ सहयोग कर रहा है। ये दोनों प्लेटफॉर्म अपने क्रिएटर समुदायों को एकजुट करने और अपने नेटवर्क में इस चैलेंज का व्यापक प्रसार करने में मदद करेंगे।