एपीजे कॉलेज ऑफ़ फाइन आर्ट्स, जालंधर के कॉमर्स‌ व मैनेजमेंट विभाग द्वारा मैकफ़ोरम के सहयोग से फाइनेंशियल लिटरेसी विषय पर दो दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन किया। इस वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य बी.कॉम और बीबीए के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को फाइनेंशियल प्लानिंग, निवेश के साधन और ज़िम्मेदार धन प्रबंधन के बारे में जागरूक करना था। इस वर्कशॉप में, प्रसिद्ध रिसोर्स वक्ता श्रीमती अनीता सैनी और श्री सी.एस. नागेश कुमार ने विशेष लेक्चर दिए। श्रीमती अनीता सैनी, जो कॉमर्स में पोस्टग्रेजुएट हैं और बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर में दो दशकों से ज़्यादा का अनुभव रखती हैं, ने विद्यार्थियों के साथ निवेश जागरूकता, म्यूचुअल फंड्स और वित्तीय योजना पर ज़रूरी जानकारी साझा की। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि युवाओं में अच्छी फाइनेंशियल आदतें डालना बहुत ज़रूरी है और विद्यार्थियों को सोच-समझकर निवेश करने के लिए प्रेरित किया। श्री सी.एस. नागेश कुमार, जिन्हें कैपिटल मार्केट और कंप्लायंस मैनेजमेंट के क्षेत्र में 17 साल से अधिक का अनुभव है, ने सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI) की भूमिका के बारे में विस्तार से बताया कि यह संस्था निवेशको के हितों की रक्षा के लिए कैसे काम करती है। उन्होंने आज के तेज़ी से बदलते आर्थिक परिवेश में फाइनेंशियल लिटरेसी की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया और विद्यार्थियों को सुरक्षित निवेश के तरीकों के बारे में मार्गदर्शन दिया। यह वर्कशॉप बहुत जानकारी भरपूर और इंटरैक्टिव साबित हुई, जिससे विद्यार्थियों को फाइनेंशियल मार्केट, बचत, निवेश और रेगुलेटरी सिस्टम के बारे में व्यवहारिक जानकारी मिली। यह पहल कॉलेज के उन लगातार प्रयत्नों का हिस्सा है जिस द्वारा विद्यार्थियों को भविष्य के लिए ज़रूरी जीवन कौशल और वित्तीय चेतना दी जा सके। कॉमर्स और मैनेजमेंट विभाग के अध्यापकों ने रिसोर्स वक्ताओं का दिल से धन्यवाद किया, जिन्होंने अपने अनुभव साझे कर के विद्यार्थियों को वित्तीय जागरूक होने और ज़िम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया। प्रिंसिपल डॉ. नीरजा ढींगरा ने इस मौके पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की वर्कशॉप विद्यार्थियों को व्यवहारिक जीवन के लिए तैयार करती हैं।क्योंकि सही वित्तीय जानकारी ही उन्हें एक सुरक्षित भविष्य की तरफ अग्रसर करती हैं। इस वर्कशाप के सफल आयोजन के लिए उन्होंने कॉमर्स विभाग के अध्यापक डॉ मनीषा शर्मा और मैडम गरिमा अरोड़ा के यत्नों की प्रशंसा की और भविष्य में भी इसी प्रकार के आयोजन करते रहने के लिए प्रेरित किया।