दिल्ली: दुनियाभर में इस वक्त एनर्जी को लेकर कोहराम मचा है। एक तरफ ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव से समंदर के रास्ते बंद होने का डर है, तो दूसरी तरफ कच्चे तेल की कीमतें 119 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर को छू रही हैं। ऐसे माहौल में आमतौर पर पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें और बढ़ी हुई कीमतें दिखती हैं, लेकिन भारतीय ग्राहकों के लिए आज की सुबह एक सुखद सरप्राइज लेकर आई है। तमाम वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद, घरेलू तेल कंपनियों ने कीमतों की ढाल बनकर आम आदमी को राहत दी है।सवाल उठता है कि जब पूरी दुनिया में तेल खौलता दिख रहा है, तो भारत में शांति क्यों है? दरअसल, भारतीय तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार के झटकों को खुद झेल रही हैं ताकि देश में महंगाई का गुब्बारा न फटे। सरकार भी बखूबी जानती है कि अगर डीजल के दाम बढ़े, तो ट्रक भाड़ा बढ़ेगा और इसका सीधा असर आपकी रसोई के बजट और सब्जी-राशन की कीमतों पर पड़ेगा। फिलहाल ब्रेंट क्रूड में आई मामूली गिरावट उम्मीद की किरण दिखा रही है, लेकिन संकट के बादल पूरी तरह छंटे नहीं हैं।आज 12 मार्च 2026 को देश के बड़े शहरों में ईंधन के दाम पुराने स्तर पर ही टिके हुए हैं। दिल्ली से लेकर मुंबई तक और पटना से लेकर बेंगलुरु तक, रेट्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अगर आप भी अपनी गाड़ी की टंकी फुल कराने की सोच रहे हैं, तो यह सही समय है क्योंकि कल क्या होगा, यह पूरी तरह मिडिल ईस्ट के हालातों पर निर्भर है। एक तरफ जहां पेट्रोल-डीजल ने राहत दी है, वहीं दूसरी तरफ एलपीजी सिलेंडर की 1000 रुपये के पार पहुंची कीमतों ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। लोग अब इस किल्लत और बढ़ते दामों से निजात पाने का इंतजार कर रहे हैं