
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एस. आर. लधर ने पंजाब सरकार के बजट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट पंजाब के गरीबों, दलितों और भूमिहीन वर्ग की समस्याओं को पूरी तरह नजरअंदाज करता है।
उन्होंने कहा कि पंजाब की लगभग 35 प्रतिशत आबादी भूमिहीन है, जिनकी आय बढ़ाने के लिए बजट में कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया। यह अत्यंत चिंताजनक है कि राज्य की लगभग 35 प्रतिशत अनुसूचित जाति आबादी के पास केवल 3.2 प्रतिशत जमीन है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर 16.5 प्रतिशत एससी आबादी के पास लगभग 8.6 प्रतिशत जमीन है। इसके बावजूद पंजाब की लगातार सरकारों(SAD, Congress, AAP) ने इस बड़े वर्ग की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कोई प्रभावी नीति नहीं बनाई।
श्री लधर ने कहा कि शिक्षा और उच्च संस्थानों में भी दलितों के साथ अन्याय हो रहा है। पंजाब के प्रमुख कृषि विश्वविद्यालयों — पीएयू (PAU) और गडवासु (GADVASU) — में शिक्षण संकाय में शून्य आरक्षण की स्थिति है। उन्होंने कहा कि यह न केवल संविधान की भावना के खिलाफ है बल्कि दलितों और गरीब वर्गों के साथ स्पष्ट अन्याय भी है।
85वी संविधानिक शोध जिसे पार्लियामेंट ने पास कर रखा है पंजाब की एंटी दलित सरकार लागू नहीं कर रही। पंजाब सरकार ने दलित एससी नौजवान जुडिसियल सर्विस में ना आ पायें इस लिए LLB और LLM पास करने के बाद भी लिखती टेस्ट में 45% नंबरों की शरत लगा रखी है। जेकर
45 % नंबर आ भी जाएं तो सर्विस से बाहर करने के लिये इंटरव्यू में इतने कम नंबर दिए जाते हैं के लिखती और इंटरव्यू को मिला कर 45% से कम हो जाते हैं और ओमिदवार बाहर।दलितों को सोचना पड़ेगा के ₹1500/- की गुलामी करनी है जा हुक्मरान बनाना है। MLA खडूर साहिब को एक दलित लड़की की पिटायी करने, छेड़छाड़ करने और गंदी नज़र रखने पर चार साल की सजा हुई पर दलित लड़की को ख़रीदा गिया, परलोभन दिया गया और समझौता किया गया। इस समझौते की कॉपी हाई कोर्ट में दी गई जिस पर ३० मार्च अगली तिथि नियत है। पर देखने वाली बात यह है कि स्पीकर विधान सभा बी चार महीने सजा के उपरांत भी लालपुरा MLA को डिसमिस न्ही किया। यह है असली चेहरा मान सरकार का।
दलितों को , ओर्त्तों को यह समझना होगा के मान सरकार सिर्फ दलितों की वोट लेकर सता में रहना चाहती
है , उन्हें मान सम्मान नहीं देना चाहती।
चीमा जैसे लोग तो वैसे ही आगे रखे हुए हैं जैसे लकड़ी काटने के लिए कुहाड़े की हथली लकड़ी की होती है। वरना कभी गढ़ी ने जा चीमा ने
MLA खडूर साहिब को डिसमिस करने का एक भी बियान दिया है?
श्री लधर ने कहा कि हरियाणा सरकार ने संविदा(Contract) कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए विशेष सरकारी निगम बनाया है, लेकिन पंजाब सरकार अन्य राज्यों के अच्छे मॉडलों से सीखने को तैयार नहीं है।
श्री लधर ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों का लगभग 18–19 प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA) लंबित होना भी सरकार की वित्तीय कुप्रबंधन को दर्शाता है।पंजाब के मुलाज़म 42% डी ए ले रहें हैं जब के भाजपा केंद्र सरकार जनवरी से 61% देने जा रही है।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि पंजाब पर लगभग ₹4.17 लाख करोड़ का कर्ज हो चुका है, जो अत्यंत गंभीर स्थिति है। आश्चर्य की बात है कि सरकार के पास यह स्पष्ट योजना ही नहीं है कि इस कर्ज के जाल से पंजाब को कैसे निकाला जाएगा।
उन्होंने कहा कि कभी देश में अग्रणी रहे पंजाब की प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) भी अन्य राज्यों से काफी पीछे चली गई है। उदाहरण के तौर पर तेलंगाना की प्रति व्यक्ति आय लगभग ₹3.87 लाख है, जो पंजाब की लगभग ₹2.23 लाख प्रति व्यक्ति आय से लगभग दोगुनी है। यह स्थिति राज्य की आर्थिक गिरावट को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
श्री लधर ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने पंजाब की आर्थिक स्थिति को कमजोर किया है और यह बात अब स्पष्ट रूप से सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि झूठे वादों और महिलाओं को दी जा रही मुफ्त योजनाओं के सहारे यह कमजोर सरकार दोबारा सत्ता में आने का सपना देख रही है। वित मंत्री सदन में बोलते हुए बड़ी बेशर्मी से और्तों को दी जाने वाली सुविधाओं के बारे बता रहे थे , बिना सोचे कि पंजाब के लोगों को क्या प्रोस रहें हैं ? क्या पंजाब के लोगों को मूर्ख समज रखा है ?