
जालंधर: भारतीय जनता पार्टी के नेता एवं पूर्व आईएएस अधिकारी श्री एस. आर. लधर ने कहा है कि महिलाओं को राजनीतिक समानता देने के मुद्दे पर Indian National Congress का रिकॉर्ड बेहद निराशाजनक रहा है। उन्होंने कहा कि 1/3 महिला आरक्षण का मुद्दा दशकों तक केवल राजनीति का शिकार बना रहा।
श्री लधर ने कहा कि Women’s Reservation Bill (33% आरक्षण) पहली बार 1996 में पेश किया गया था, जिसका उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई प्रतिनिधित्व देना था। लेकिन यह विधेयक बार-बार संसद में पेश होने के बावजूद पारित नहीं हो सका।
उन्होंने कहा कि 1996 से लेकर 2010 तक यह बिल कई बार लाया गया—1998, 1999, 2003 और बाद में 2008 में पुनः प्रस्तुत किया गया। हर बार कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की अनिर्णय की स्थिति, अंदरूनी विरोध और राजनीतिक समझौते इस बिल के रास्ते में बाधा बने।
श्री लधर ने कहा कि 2010 में यह विधेयक राज्यसभा में पारित हुआ, लेकिन लोकसभा में इसे जानबूझकर लंबित रखा गया और पारित नहीं कराया गया। उस समय केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार होने के बावजूद, उसने इस ऐतिहासिक अवसर को गंवा दिया। यदि कांग्रेस वास्तव में महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति गंभीर होती, तो वह अपने बहुमत और राजनीतिक प्रभाव का उपयोग कर इसे कानून बना सकती थी।
उन्होंने कहा कि यह भी एक सच्चाई है कि कांग्रेस ने अपने सहयोगी दलों के विरोध के आगे बार-बार घुटने टेके, जबकि महिलाओं को समान प्रतिनिधित्व देने के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता थी। यह केवल राजनीतिक असफलता नहीं, बल्कि देश की महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय था।
श्री लधर ने कहा कि इससे पहले भी Dr. B. R. Ambedkar द्वारा लाया गया Hindu Code Bill कांग्रेस के विरोध के कारण ठंडे बस्ते में चला गया, जिससे महिलाओं को समान अधिकार मिलने में वर्षों की देरी हुई।
उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि महिलाओं की समानता के मुद्दे पर कांग्रेस का रुख हमेशा अस्पष्ट और अवसरवादी रहा है।इंडी अलायन्स नहीं चाहता के देश की महलाएँ आगे आयें। यह मनुवादी मानसिकता के लोग आज भी महिलाओं को सशक्त होने में रोड़ा अटका रहे हैं। महिलाओं को रोकना भाव देश की ऊनती को कमजोर करना है। इंडी अलायन्स के नेता लोग देश के हित में हैं या विरोध में ? यह देखना है भारत के लोगों को। कांग्रेस और इस के सहयोगी दल कमज़ोर वर्गों के हमेशाँ विरोधी रहें हैं। उनके अधिकार उनको ना मिलें जा जियादा से जियादा विलम्ब से मिलें , यही उनकी नीति रही है।
श्री लधर ने देश की महिलाओं से आह्वान किया कि वे इतिहास के इन तथ्यों को समझें और उन ताकतों को पहचानें जिन्होंने उनके अधिकारों को आगे बढ़ाया और जिन्होंने उन्हें रोका।