दिल्ली: नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार आज तड़के तिब्बत में भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 4.1 दर्ज की गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि तीव्रता कम होने के कारण फिलहाल किसी बड़े जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है। भूकंप शुक्रवार को भारतीय समयानुसार सुबह 3:10 बजे आया। गहराई जमीन से 38 किलोमीटर नीचे थी। वहीं NCS के डेटा के मुताबिक भूकंप का केंद्र 35.385 उत्तरी अक्षांश और 85.112 पूर्वी देशांतर पर स्थित था।बता दें कि उथले भूकंप आमतौर पर गहरे भूकंपों की तुलना में ज़्यादा खतरनाक होते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि उथले भूकंपों से निकलने वाली भूकंपीय तरंगें सतह तक पहुंचने के लिए कम दूरी तय करती हैं जिसके परिणामस्वरूप ज़मीन ज़्यादा ज़ोर से हिलती है इमारतों को ज़्यादा नुकसान पहुंचता है और ज़्यादा लोगों की जान जाती है। तिब्बती पठार की पहचान टेक्टोनिक प्लेटों के टकराने से होने वाली भूकंपीय गतिविधियों के कारण होती है।तिब्बत और नेपाल एक मुख्य भूवैज्ञानिक फॉल्ट लाइन पर स्थित हैं जहां भारतीय टेक्टोनिक प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकराती है जिसके कारण अक्सर भूकंप आते रहते हैं। यह क्षेत्र टेक्टोनिक उत्थान के कारण भूकंपीय रूप से सक्रिय है यह उत्थान इतना मज़बूत हो सकता है कि हिमालय की चोटियों की ऊंचाई में भी बदलाव ला सकता है।