प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार के मार्गदर्शन में डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर की राष्ट्रीय सेवा योजना (एन.एस.एस.) इकाई एवं रेड रिबन क्लब ने डी.ए.वी. कॉलेजिएट सीनियर सेकेंडरी स्कूल के सहयोग से 5 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस का आयोजन किया। इस अवसर पर पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यू.एन.ई.पी.) के #नाओ फॉर क्लाइमेट # अभियान के अंतर्गत इस वर्ष की वैश्विक थीम “प्रकृति से प्रेरित : जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए” पर आधारित था। इस वर्ष इस अभियान की मेज़बानी अज़रबैजान गणराज्य की राजधानी बाकू द्वारा की जा रही है।

कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण अभियान के साथ हुआ, जिसका नेतृत्व उप-प्राचार्य डॉ. कुँवर राजीव एवं कुलसचिव प्रो. अशोक कपूर ने एन.एस.एस. स्वयंसेवकों के साथ मिलकर किया। इस अवसर पर डॉ. कुँवर राजीव ने विद्यार्थियों को हरित एवं सतत् परिसर निर्माण हेतु सामूहिक संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वनस्पति विज्ञान विभाग की डॉ. सपना शर्मा का व्याख्यान रहा। उन्होंने विश्व पर्यावरण दिवस के महत्व तथा पर्यावरण संरक्षण की वर्तमान आवश्यकता पर प्रकाश डाला। समकालीन पर्यावरणीय चुनौतियों की चर्चा करते हुए उन्होंने बढ़ते जलवायु संकट, वैश्विक तापमान में वृद्धि, अनियमित मौसम चक्र तथा जैव विविधता पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने वायु, जल एवं मृदा प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त की तथा विशेष रूप से माइक्रोप्लास्टिक के बढ़ते खतरे की ओर ध्यान आकर्षित किया, जो अब खाद्य श्रृंखलाओं, जल स्रोतों तथा मानव रक्त प्रवाह तक में पहुँच चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ये प्रदूषक सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं पारिस्थितिक संतुलन के लिए एक गंभीर और दूरगामी खतरा हैं। उन्होंने बल देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों और संस्थानों का दायित्व नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सांझा जिम्मेदारी है।

डी.ए.वी. कॉलेजिएट सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रभारी प्रोफेसर डॉ. रेनुका मल्होत्रा ने प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने विशेष रूप से जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया तथा डिजिट्ल युग की छिपी हुई पर्यावरणीय लागतों पर विचार करने और दैनिक जीवन में जिम्मेदार एवं संतुलित उपभोग की आदतें अपनाने का आह्वान किया।

गणित विभाग की डॉ. सीमा शर्मा ने उपस्थित सभी लोगों को पर्यावरण संरक्षण हेतु रचनात्मक एवं सकारात्मक कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक छोटा प्रयास महत्वपूर्ण होता है और सामूहिक प्रयासों का समग्र प्रभाव ही पृथ्वी के भविष्य को सुरक्षित एवं स्वस्थ बनाता है।

कार्यक्रम के समापन चरण में एन.एस.एस. स्वयंसेविका मनीषा ने छात्र समुदाय के दृष्टिकोण से पर्यावरण संरक्षण पर अपने विचार व्यक्त किए तथा सभी स्वयंसेवकों से अपील की कि वे जागरूकता को केवल विचारों तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने दैनिक व्यवहार एवं सामाजिक जीवन में भी क्रियान्वित करें।

अंत में स्वयंसेवकों को पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन एवं संरक्षण तथा पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने की शपथ दिलाई गई। इसी के साथ कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

इस अवसर पर कार्यक्रम अधिकारी डॉ. गुरजीत कौर, सुश्री सुरुचि काटला एवं डॉ. सुमित, प्रो. कुलदीप खुल्लर सहित बड़ी संख्या में एन.एस.एस. स्वयंसेवक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे और उन्होंने उत्साहपूर्वक कार्यक्रम में सहभागिता की।