

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) एवं आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की उच्चस्तरीय टीम ने धान की कटाई के मौजूदा सीजन के दौरान पंजाब के अमृतसर और तरनतारन जिलों का दौरा किया। आयोग के सदस्य (तकनीकी) डॉ. एस. डी. अत्री की अध्यक्षता में पहुंची इस टीम ने पराली जलाने की अधिक घटनाओं वाले हॉटस्पॉट क्षेत्रों में रोकथाम के उपायों का निरीक्षण किया। टीम ने 10 अक्टूबर को अमृतसर में दोनों जिलों के उपायुक्तों (DCs) और अन्य जिला अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की।
आयोग द्वारा फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात करने के साथ-साथ किया गया यह दौरा पराली जलाने की घटनाओं को कम करने और पूरी तरह समाप्त करने के उद्देश्य से उठाए जा रहे कदमों का हिस्सा है। पराली जलाना सर्दियों के दौरान राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है।
समीक्षा बैठक में संबंधित विभागों और जिला प्रशासन की तैयारियों, आपसी समन्वय तथा धान की पराली के खेतों में ही प्रबंधन (इन-सीटू) और खेतों से बाहर उपयोग (एक्स-सीटू) की व्यवस्था पर चर्चा की गई। आयोग ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनें समय पर उपलब्ध करवाने, जागरूकता बढ़ाने, सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) गतिविधियां चलाने और किसानों को आवश्यक सहयोग प्रदान करने पर विशेष जोर दिया।
इसके अतिरिक्त, CAQM की टीम ने 9 और 10 अक्टूबर को अमृतसर तथा तरनतारन जिलों के चयनित हॉटस्पॉट गांवों और संबंधित सुविधाओं का दौरा कर जमीनी स्थिति का आकलन किया। इस दौरान पराली जलाने की रोकथाम के लिए लागू किए गए उपायों की समीक्षा भी की गई।
अमृतसर जिले में पराली प्रबंधन की व्यवस्थाओं की समीक्षा
अमृतसर जिले में बैठक और फील्ड विजिट के दौरान धान की कटाई एवं खरीद की स्थिति तथा फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों की उपलब्धता और तैनाती की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि अमृतसर और आसपास के जिलों की बेलर मशीनें धान की पराली एकत्र करने और उसके प्रबंधन के लिए काम कर रही हैं।
पराली की गांठों का खेतों से बाहर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए बॉयलर वाली औद्योगिक इकाइयों के साथ आपूर्ति श्रृंखला विकसित की गई है। किसानों और पराली एकत्र करने वाले एग्रीगेटर्स को इन उद्योगों से जोड़ा गया है, ताकि पराली का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सके।
जिले में जिला प्रशासनिक परिसर में कंट्रोल रूम और हेल्प डेस्क भी स्थापित किए गए हैं। इनके माध्यम से ऐसे किसानों की पहचान की जाती है, जिन्हें CRM मशीनों की आवश्यकता है, और उन्हें मशीनें उपलब्ध करवाने में सहायता दी जाती है। आग लगने तथा पराली जलाने की घटनाओं की सूचना देने के लिए जिला स्तरीय हेल्पलाइन भी जारी की गई है, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके।
तरनतारन में निगरानी और प्रवर्तन उपायों पर जोर
तरनतारन जिले में भी धान की कटाई एवं खरीद की स्थिति और किसानों के लिए CRM मशीनों की उपलब्धता तथा तैनाती की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि तरनतारन और आसपास के जिलों की बेलर मशीनें पराली के प्रभावी एक्स-सीटू प्रबंधन के लिए कार्य कर रही हैं। जिले ने किसानों के लिए CRM मशीनों की खरीद और उपलब्धता से संबंधित अपने लक्ष्यों को काफी हद तक हासिल कर लिया है।
बैठक में नोडल अधिकारियों, क्लस्टर अधिकारियों और अन्य मैदानी कर्मचारियों के माध्यम से व्यापक गश्त एवं निगरानी किए जाने की जानकारी भी दी गई। इसके साथ ही किसानों को जागरूक करने, सूचना, शिक्षा एवं संचार गतिविधियां चलाने तथा पराली के इन-सीटू और एक्स-सीटू उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रवर्तन उपायों पर भी चर्चा हुई।
दोनों जिलों के अधिकारियों ने CAQM के वैधानिक निर्देशों को लागू करने, रोकथाम के उपायों को मजबूत करने और अपने-अपने जिलों में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए समन्वित प्रयास करने की प्रतिबद्धता जताई।
पंजाब के 18 जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात
पराली जलाने की घटनाओं पर निगरानी के लिए आयोग ने पंजाब के 18 जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए हैं। ये टीमें 1 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक तैनात रहेंगी।
इन जिलों में संगरूर, तरनतारन, फिरोजपुर, मुक्तसर, बठिंडा, अमृतसर, मोगा, मानसा, फाजिल्का, पटियाला, लुधियाना, कपूरथला, फरीदकोट, बरनाला, मलेरकोटला, गुरदासपुर, जालंधर और फतेहगढ़ साहिब शामिल हैं।
लगातार निगरानी और विभागीय समन्वय के निर्देश
CAQM ने जिला अधिकारियों, नोडल अधिकारियों और क्लस्टर अधिकारियों को लगातार तथा प्रभावी मैदानी निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विशेष रूप से पराली जलाने की घटनाओं वाले संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया गया है। कम लागत वाले सेंसरों और अन्य निगरानी प्रणालियों का उपयोग करने के साथ-साथ प्रवर्तन गतिविधियों को बिना किसी ढिलाई के जारी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
आयोग ने किसानों, एग्रीगेटर्स, औद्योगिक इकाइयों और अन्य संबंधित पक्षों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने को कहा है, ताकि पराली के एक्स-सीटू प्रबंधन की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत हो सके। साथ ही CRM मशीनों, बेलर मशीनों, मैदानी कर्मचारियों, निगरानी प्रणालियों और कंट्रोल रूम का अधिकतम प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया।
आयोग धान की पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए संबंधित राज्य सरकारों, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और जिला प्रशासनों द्वारा किए जा रहे प्रयासों की लगातार निगरानी, समीक्षा और समन्वय कर रहा है।
CAQM ने दोहराया कि धान की कटाई के मौजूदा सीजन में पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा। इसके साथ ही किसानों और अन्य हितधारकों का सक्रिय सहयोग तथा उन्हें समय पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाना भी बेहद जरूरी है।



