

फगवाड़ा 21 अक्टूबर (शिव कौड़ा) भगत ज्वाला दास दशहरा कमेटी गांव लखपुर, तहसील फगवाड़ा की ओर से समूचे सोनी परिवार, एनआरआई भाइयों और क्षेत्र की संगतों के सहयोग से बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पारंपरिक दशहरा मेला श्रद्धा, उत्साह और धूमधाम से मनाया गया। समारोह में संत प्रीतम दास संगतपुर और पावरकॉम के एक्सईएन हरदीप कुमार ने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थिति दर्ज करवाई। पंडित गौरी शंकर के निर्देशन में गांव के दशहरा मैदान में राम नाटक का शानदार मंचन किया गया। इससे पहले भगवान श्रीराम और रावण की सेनाओं की ओर से गांव में परिक्रमा निकाली गई। शाम को सोनी परिवार के सदस्यों गगन सोनी, गौरव सोनी, पुनीत सोनी, अनिल सोनी, राजेश सोनी और जवाहर लाल सोनी ने रावण,मेघनाद और कुंभकर्ण के विशाल पुतलों को अग्नि भेंट किया। इस दौरान मैदान में मौजूद लोगों ने उत्साह के साथ दशहरे का पर्व मनाया।अहंकारी व्यक्ति का विनाश निश्चित होता है : संत प्रीतम दास : संत प्रीतम दास संगतपुर ने कहा कि दशहरे का त्योहार बुराई पर सच्चाई की जीत का प्रतीक है। यह पर्व हमें प्रेरणा देता है कि जीवन में कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार के कारण मनुष्य की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है और अंतत: अहंकारी व्यक्ति का विनाश निश्चित हो जाता है। उन्होंने लोगों से सदाचार, विनम्रता और सच्चाई के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। वहीं पावरकॉम के एक्सईएन हरदीप कुमार ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को हमेशा अच्छाई के रास्ते पर चलना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से नशे से दूर रहने और अपनी ऊर्जा को सकारात्मक कार्यों में लगाने की अपील की। समारोह में संत प्रीतम दास संगतपुर, एक्सईएन हरदीप कुमार और करनदीप परथी कपूरथला के अलावा कनाडा से पहुंचे कुलवर्ण सिंह, निर्मल सिंह और जसवीर सिंह तथा यूके से पधारे सुलक्खन सिंह, गुरमुख सिंह और रविंदर सिंह ने संगत को दशहरे की शुभकामनाएं दीं।प्रबंधकों ने जताया एन.आर.आईज और सोनी परिवार का आभार भगत ज्वाला दास दशहरा कमेटी लखपुर की ओर से मुख्य अतिथियों, गणमान्य व्यक्तियों, राम नाटक में भाग लेने वाले कलाकारों और सहयोगियों को सम्मानित किया गया। आयोजकों ने दशहरा मेले को सफल बनाने में योगदान देने के लिए समूचे सोनी परिवार और एनआरआई भाइयों का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। मेले के दौरान एसएचओ पूरन सिंह रावलपिंडी के नेतृत्व में सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए थे। मंच संचालन पंडित गौरी शंकर ने बखूबी किया।



