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एलपीयू ने आयोजित किया 7वां ‘गैवेल्ड मूट कोर्ट कॉम्पिटिशन 2026’, जिसमें भारत की उभरती कानूनी प्रतिभाओं ने हिस्सा लिया

जालंधर; लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में आयोजित 7वें ‘गैवेल्ड नेशनल मूट कोर्ट कॉम्पिटिशन’ में पूरे भारत के संस्थानों से 30 से ज़्यादा टीमों ने भाग लिया। इनमें नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, केंद्रीय और स्टेट यूनिवर्सिटी, और निजी संस्थान शामिल थे। स्कूल ऑफ़ लॉ द्वारा आयोजित इस तीन-दिवसीय प्रतियोगिता ने युवाओं को अदालत की कड़ी कार्यवाही में शामिल होने के लिए एक केंद्रित मंच प्रदान किया, जहाँ उन्होंने अपनी मज़बूत विश्लेषणात्मक क्षमता, विचारों की स्पष्टता और प्रभावशाली वकालत का प्रदर्शन किया।

प्रतियोगिता की शुरुआत माननीय न्यायमूर्ति तलवंत सिंह, (दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश) द्वारा औपचारिक रूप से ‘गैवेल’ (न्यायाधीश का हथौड़ा) बजाकर की गई। इसके साथ ही कार्यवाही को शुरू किया गया और बौद्धिक रूप से विचार-विमर्श के लिए माहौल तैयार किया गया। इस संस्करण के लिए मूट प्रस्ताव आपराधिक कानून के समकालीन मुद्दों पर केंद्रित था, जिसमें क्रिमिनल लाइबिलिटी, जाँच में प्रक्रियात्मक चूक, और बदलते कानूनी ढांचे के भीतर इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की स्वीकार्यता और विश्वसनीयता जैसे पहलुओं की जाँच की गई।

डॉ. अशोक कुमार मित्तल, संसद सदस्य (राज्यसभा) और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कानूनी शिक्षा केवल सिद्धांत तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसमें प्रैक्टिकल अनुभव के साथ-साथ मज़बूत नैतिक मूल्य भी शामिल होने चाहिए। डॉ. मित्तल ने यूनिवर्सिटी की प्रगतिशील ‘एजुकेशन रेव्लयूशन नीति’ के बारे में भी जानकारी साझा की; यह नीति संरचित इंटर्नशिप और ‘ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग’ के अवसरों के माध्यम से वास्तविक दुनिया की सीख को शिक्षा में एकीकृत करने पर केंद्रित है, जिससे छात्रों को अपनी अकादमिक पढ़ाई के साथ-साथ प्रैक्टिकल स्किल्स विकसित करने में भी मदद मिलती है।

शुरूआत राउंड 16 अलग-अलग कोर्टरूम में आयोजित किए गए, और इनका निर्णय लुधियाना तथा जालंधर की ज़िला बार एसोसिएशन के वकीलों द्वारा किया गया। जैसे-जैसे प्रतियोगिता आगे बढ़ी, टॉप प्रदर्शन करने वाली टीमें अगले चरणों में पहुँचीं—जिनमें प्री-क्वार्टर फ़ाइनल, क्वार्टर फ़ाइनल और सेमी-फ़ाइनल शामिल थे; हर अगला दौर कानूनी जाँच-परख और प्रतिस्पर्धा के स्तर को और भी अधिक गहन बनाता गया।

इस समारोह का निर्णय जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश श्री वसीम सादिक नरगल ने, मेजर जनरल विजय कुमार, एवीएसएम (सेवानिवृत्त) और पूर्व जज एडवोकेट जनरल के साथ मिलकर की। प्रतियोगिता का समापन विभिन्न श्रेणियों में कुल ₹1.12 लाख की नकद पुरस्कार राशि के वितरण के साथ हुआ। सिम्बायोसिस लॉ स्कूल, पुणे विजेता बनकर उभरा और उसे ‘बेस्ट मेमोरियल’ पुरस्कार भी मिला, जबकि जय नारायण व्यास यूनिवर्सिटी, जोधपुर उपविजेता रहा।

यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज, पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ को ‘बेस्ट रिसर्चर’ का पुरस्कार दिया गया, जबकि लिंकन कॉलेज ऑफ लॉ, सरहिंद ने ‘बेस्ट मूटर’ का खिताब जीता। ‘राइजिंग स्टार’ श्रेणियों में, डॉ. बी.आर. अंबेडकर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, सोनीपत; आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ; और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, आरसी जालंधर को क्रमशः ‘रिसर्चर’, ‘मेमोरियल’ और ‘मूटर’ के लिए सम्मानित किया गया।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, न्यायमूर्ति नरगल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कानूनी पेशे की नींव ईमानदारी, विनम्रता और ज़िम्मेदारी की गहरी भावना पर टिकी होती है। न्यायमूर्ति नरगल ने भावी वकीलों को न्याय और संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने के प्रति समर्पित रहने, और साथ ही समाज में सार्थक योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया। इस अवसर की गरिमा एलपीयू की प्रो-चांसलर कर्नल डॉ. रश्मि मित्तल और एलपीयू के डायरेक्टर जनरल एच.आर. सिंगला की उपस्थिति से और भी बढ़ गई।

विभिन्न विषयों में इस तरह के बड़े पैमाने के शैक्षणिक कार्यक्रमों का लगातार आयोजन करके, एलपीयू छात्रों के लिए प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने, आलोचनात्मक सोच विकसित करने और पेशेवर आत्मविश्वास बढ़ाने के अवसर लगातार सृजित कर रहा है।

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