
चंडीगढ़, 15 अप्रैल
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने प्रचारित “भ्रष्टाचार के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस” के सिद्धांत पर वास्तव में काम किया होता, तो आज ईडी या सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों को पंजाब आने की आवश्यकता नहीं पड़ती। लेकिन मुख्यमंत्री आज भी “कट्टर ईमानदारी” के प्रमाणपत्र बांटते रहते हैं, जबकि सच्चाई हर दिन जनता के सामने उजागर हो रही है।
हालिया मामले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि चार साल तक आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा छात्रवृत्ति घोटाले को दबाने के बावजूद, हाई कोर्ट की टिप्पणियों ने अब सरकार की मंशा को स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पहले इस बड़े घोटाले पर काफी शोर मचाया था, लेकिन अब यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसा कौन-सा समझौता हुआ कि उन्होंने इस मुद्दे पर बोलना बंद कर दिया।
जाखड़ पत्रकारों द्वारा एक आम आदमी पार्टी सांसद के खिलाफ ईडी की जांच पर पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि संबंधित व्यक्ति केवल सांसद ही नहीं, बल्कि एक निजी विश्वविद्यालय का मालिक भी है। हाई कोर्ट की हालिया सख्त टिप्पणियों के बाद संभव है कि ईडी ने भी इस मामले पर ध्यान दिया हो। उन्होंने मुख्यमंत्री को जांच पूरी होने तक इंतजार करने की सलाह दी।
सुनील जाखड़ ने कहा कि पंजाब में गरीब छात्रों के लिए बनाई गई पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में बड़ा घोटाला हुआ। इसमें सामने आया कि कई बड़े कॉलेजों और विश्वविद्यालयों ने गरीब छात्रों के नाम पर सरकारी खजाने को लूटा और हजारों अनुसूचित जाति के छात्रों की शिक्षा को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने सवाल उठाया कि चाहे इन संस्थानों के मालिक कोई भी हों, जांच क्यों नहीं होनी चाहिए?
मुख्यमंत्री द्वारा हाल ही में अपने मंत्रियों और विधायकों को भ्रष्टाचार से दूर रहने की चेतावनी देने के संदर्भ में जाखड़ ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री को सब कुछ पता है, तो कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? वे अपने ही लोगों को क्यों बचा रहे हैं, जबकि बैठकों में स्वीकार कर रहे हैं कि उन्हें सब कुछ मालूम है?
जाखड़ ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा की जा रही कार्रवाई बदले की भावना से नहीं, बल्कि कानून अपना काम कर रहा है। उन्होंने यह भी मांग की कि पंजाब डेवलपमेंट काउंसिल के नाम पर बिना किसी संवैधानिक अधिकार के की गई नियुक्तियों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया कि उन्होंने शासन बाहरी लोगों को सौंपकर पंजाब की जनता के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने कहा कि जनता इसे माफ नहीं करेगी और अगली चुनाव में जवाब देगी, जैसा दिल्ली में हुआ था।
बीबीएमबी मुद्दे पर एक अन्य प्रश्न के उत्तर में जाखड़ ने कहा कि पंजाब के पास किसी अन्य राज्य को देने के लिए एक बूंद पानी भी नहीं है। उन्होंने कहा कि पंजाब के लिए पानी केवल तकनीकी या प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि भावनात्मक विषय है, और इस पर चर्चा करते समय इन भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब के जल से जुड़े किसी भी निर्णय में राज्य सरकार को साथ लेना अनिवार्य है, भले ही सरकार का रिकॉर्ड कमजोर रहा हो—चाहे बीबीएमबी में अपने कोटे की 1780 रिक्तियां भरने में विफलता हो या बाढ़ के दौरान माधोपुर बांध के गेट गिरने की घटना में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई न होना।