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अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का झुलसाना शुरू, पर भारत में नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

दिल्ली: पश्चिम एशिया में सुलगती जंग की लपटों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को झुलसाना शुरू कर दिया है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण पिछले एक हफ्ते में ही कच्चे तेल के भाव 15 फीसदी उछलकर 84 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुके हैं। दुनिया भर में तेल की सप्लाई रुकने का डर बना हुआ है, लेकिन भारतीय रसोई और गाड़ियों की रफ़्तार पर इसका कोई ब्रेक नहीं लगेगा। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद देश में तेल और गैस की कीमतों में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी भारत ने कूटनीतिक सूझबूझ दिखाते हुए अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी एक देश पर निर्भरता खत्म कर दी है। कतर द्वारा गैस उत्पादन बंद करने के फैसले से जो रिक्तता आई है, उसे भरने के लिए ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने हाथ आगे बढ़ाया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने रणनीतिक बदलाव करते हुए अब अमेरिका से भी करीब 10 फीसदी एलपीजी लेना शुरू कर दिया है, जबकि रूस से कच्चे तेल का आयात पहले ही बढ़ा दिया गया है। सरकार का भरोसा है कि अगर ओपेक देशों से सप्लाई में बाधा आती है, तो भी हमारे पास नए और सुरक्षित बाजार मौजूद हैं देशवासियों को आश्वस्त करते हुए अधिकारियों ने बताया कि भारत के पास वर्तमान में लगभग 50 दिनों का इमरजेंसी कोटा उपलब्ध है। इसमें 25 दिनों की जरूरत का कच्चा तेल और अगले 25 दिनों के लिए पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक शामिल है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील समुद्री रास्तों से होने वाले 40 फीसदी व्यापार पर नजर रखते हुए भारत ने बाकी 60 फीसदी आयात को वैकल्पिक और सुरक्षित रास्तों पर शिफ्ट कर दिया है।

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